घर में दुकान-दफ्तर चलाना पड़ेगा भारी? सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के नगर निकायों को दिए ये निर्देश
Updated on
23 Sep 2026, 11:40 AM
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देशभर के नगर निगमों और नगर निकायों को आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल के खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जिन आवासीय संपत्तियों में नियमों का उल्लंघन कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, उनकी पहचान कर उल्लंघन पाए जाने पर उन्हें सील किया जाए।- जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि जिन इलाकों को स्पष्ट रूप से न तो आवासीय और न ही व्यावसायिक उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है, उनकी भी जांच की जाए, लेकिन फिलहाल ऐसे क्षेत्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए।
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी स्थानीय निकायों को यह कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के करनी होगी। पीठ ने चेतावनी दी कि अगर अधिकारी किसी खास व्यक्ति या संपत्ति को चुनकर कार्रवाई करेंगे तो कोर्ट इसे गंभीरता से लेगा।
सील का आदेश
- देशभर के नगर निकायों को निर्देश, आवासीय इलाकों में व्यावसायिक इस्तेमाल की व्यापक जांच करें
- 'चुनिंदा कार्रवाई' पर कोर्ट की सख्त चेतावनी
- आवासीय संपत्तियों पर व्यावसायिक गतिविधियां होने पर सील के दिए आदेश
चेन्नई की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई में अवैध निर्माण से जुड़ी एक याचिका का दायरा बढ़ाते हुए इस समस्या की देशव्यापी स्तर पर जांच करने का फैसला किया था। भवन निर्माण उपनियमों के व्यापक उल्लंघन पर चिंता जताई थी।देशभर में अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल पर नजर
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक नगर निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल की पहचान कर नियमों के उल्लंघन की जांच करनी होगी। कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई में समानता बरती जाए और किसी व्यक्ति या संपत्ति को चुनकर निशाना न बनाया जाए। यह निर्देश चेन्नई में अवैध निर्माण से जुड़े मामले को व्यापक मुद्दे के तौर पर देखने के दौरान दिया गया।