राहुल गांधी और सोनिया ने जवाब मे कहा कि डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 की शिकायत मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू करने के लिए कानूनी तौर पर आधार नहीं बन सकता है। राहुल गांधी और सोनिया ने कहा कि ईडी की 2014 से 2021 तक की इंटरनल नोटिंग्स, 2015 का एक टेक्निकल सर्कुलर, और एफएटीएफ में उसके अपने सबमिशन, ये सब दिखाते हैं कि ईडी खुद मानता था कि आगे बढ़ने से पहले एफआईआर जरूरी है।
- जवाब में राहुल गांधी और सोनिया ने टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि ईडी ने ट्रायल कोर्ट के 16 दिसंबर के ऑर्डर के 24 घंटे के अंदर हाई कोर्ट में चुनौती दे दी जबकि ऐसे मामलो मे आम तौर पर इंटरनल अप्रूवल की जरूरत होती है।
- उन्होंने बताया कि इस मामले में पीएमएलए के तहत अभियोजन चलाने से विपरीत स्थिति उत्पन्न हो जाएगी, जहां ईडी को किसी सार्थक जांच के अभाव में अनुसूचित अपराध की जांच का अधिकार लेना पड़ेगा, जो 'अधिनियम की योजना के बिल्कुल विपरीत' होगा।
- गांधी परिवार ने यह भी बताया कि ईडी का वर्षों से यही रुख रहा है कि 'वह (आधारभूत अपराध) एफआईआर के अभाव में किसी एक कंपनी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही शुरू नहीं कर सकता,' और 'एफआईआर के अभाव में पीएमएलए के तहत संज्ञान नहीं लिया जा सकता।'
- गांधी परिवार ने कहा कि विभाग को ही ज्ञात कारणों से और स्पष्ट रूप से कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत, इस मामले में इस बात की अनदेखी की गई है।
