एक अनुमान के मुताबिक गोल्ड ETFs की कुल इंडस्ट्री का आकार लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये है। इसमें से एक तिहाई हिस्सा FoF रूट के जरिए आता है। एक टॉप फंड मैनेजर ने कहा, "ETFs मुख्य फंड होते हैं और FoFs अपना पैसा इन्हीं में लगाते हैं।"
क्या होगा असर?
इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि भारत में गोल्ड ETFs का आकार कुल म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का लगभग 2% है। ऐसे में, गोल्ड FoFs में नए निवेश पर रोक लगाने के फैसले से भारत में सोने की मांग पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।हाल ही में, सरकार ने सोने के आयात को सीमित करने की कोशिश की है, क्योंकि इससे देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार बाहर चला जाता है। इसी के चलते, सरकार ने सोने पर आयात शुल्क को पहले के लगभग 7-8% से बढ़ाकर 15% कर दिया है।
टाटा म्यूचुअल फंड
इससे पहले गुरुवार देर शाम टाटा म्यूचुअल फंड ने घोषणा की कि वह टाटा गोल्ड ETF फंड ऑफ फंड में एकमुश्त निवेश (lump-sum), नए सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान (STP) रजिस्ट्रेशन पर कुछ समय के लिए रोक लगा रहा है। यह बदलाव 16 अक्तूबर, 2026 यानी आज से लागू होगा।फंड हाउस ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा SIP/STP रजिस्ट्रेशन के तहत किस्तें आती रहेंगी और उन्हें लागू नेट एसेट वैल्यू (NAV) के हिसाब से प्रोसेस किया जाएगा। एक बयान में फंड हाउस ने कहा कि इस रोक के दौरान भी रिडेम्पशन, स्विच-आउट और मौजूदा सिस्टेमेटिक विड्रॉल प्लान (SWP) की सुविधा जारी रहेगी। साथ ही बताया गया कि यह रोक केवल कुछ समय के लिए है।



