गोयल ने यहां ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम’ में कहा, ‘‘हम दुनिया के सभी देशों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते हमें उचित शर्तों पर समझौता मिले, आपसी संपर्क एवं सहयोग में निरंतरता बनी रहे और भू-राजनीतिक स्थिति खराब न हो। मुझे लगता है कि अतीत में हमारी कुछ चिंताएं थीं। हम चीन के साथ एक बार फिर संबंध बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं लेकिन इस यात्रा का अंतिम पड़ाव अभी तय नहीं हुआ है।’’
भारत-अमेरिका ट्रेड
गोयल की ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 118.39 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को भारत का निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2024-25 में यह 14.25 अरब डॉलर था। दूसरी ओर, इस अवधि में आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.62 अरब डॉलर हो गया।गत वित्त वर्ष में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 85 अरब डॉलर था। यह देश के लिए चिंता का विषय है। चीन से निवेश को लेकर भी मुद्दे हैं। भारत ने चीन के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए नियम सख्त किए हैं।



