राजधानी भोपाल के अमरनाथ रोड से जागरण लेक सिटी जाने वाले रास्ते पर गुरुवार रात टाइगर का मूवमेंट देखा गया है। कोलार थाना पुलिस की डायल-112 टीम को यह टाइगर दिखाई दिया। इसका वीडियो भी सामने आया है। 16 सेकंड के इस वीडियो में टाइगर सड़क किनारे जाली के पार बैठा नजर आ रहा है।
यह इलाका बाघों के भ्रमण क्षेत्र में आता है। यहां पहले से कई बाघों की मौजूदगी है। ऐसे में वन विभाग ने इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को अलर्ट किया है। वीडियो गुरुवार रात का बताया जा रहा है।
यहां कई बाघ
बाघ मित्र राशिद नूर ने बताया कि कलियासोत डैम, चंदनपुरा, केरवा समेत आसपास के जंगलों में कई बाघ हैं। इन्हीं इलाकों में अब फिर से मूवमेंट देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जब-जब शहर में मास्टर प्लान, भूमि उपयोग या शहरी विस्तार की चर्चा तेज होती है, तब बाघ अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए जंगल और शहर की सीमाओं का एहसास करा देते हैं।
यह संयोग ही सही, लेकिन हर बार यह संदेश छोड़ जाता है कि प्रकृति और नियोजित विकास के बीच संतुलन बनाए रखना ही भोपाल की सबसे बड़ी पहचान है।
25 किलोमीटर के दायरे में बाघों का मूवमेंट
भोपाल के आसपास करीब 25 किलोमीटर के दायरे में बाघों का मूवमेंट है। कलियासोत और केरवा के जंगलों के साथ ही कोलार-बैरसिया इलाके में भी टाइगर देखे गए हैं। फरवरी 2022 में चूना भट्टी चौराहे स्थित भोज यूनिवर्सिटी कैंपस में भी टाइगर का मूवमेंट सामने आया था। कोलार में भी टाइगर देखा जा चुका है।
13 रेसिडेंशियल बाघ
भोपाल के कलियासोत, केरवा, समरधा, अमोनी और भानपुर के दायरे में 13 रेसिडेंशियल बाघ हैं। इनका जन्म यहीं हुआ है और अब इसी क्षेत्र में इनका दबदबा कायम है। बाघिन टी-123 का तो पूरा कुनबा है। कई बार भोज यूनिवर्सिटी में भी बाघ की चहल-कदमी देखने को मिली है। शहर से जुड़े रातापानी के जंगल में भी बाघों की मौजूदगी है।

