शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन ही जरूरी नहीं हैं, बल्कि जिंक जैसे मिनरल्स भी अहम भूमिका निभाते हैं। जिंक की जरूरत शरीर को कम मात्रा में होती है, लेकिन यह इम्यून सिस्टम, कोशिकाओं की वृद्धि, डीएनए और प्रोटीन के निर्माण तथा घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं में शामिल है। जब शरीर को पर्याप्त जिंक नहीं मिलता, तो इसका असर त्वचा, बालों, स्वाद और सूंघने की क्षमता सहित कई कार्यों पर दिखाई दे सकता है।
हालांकि, इन बदलावों का मतलब हमेशा जिंक की कमी होना नहीं है। बाल झड़ना, बार-बार बीमार पड़ना या स्वाद में बदलाव के पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए लक्षणों को समझने के साथ यह जानना भी जरूरी है कि जिंक की कमी की पहचान कैसे की जाती है और इसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
जिंक शरीर में इम्यूनिटी से लेकर सेल्स ग्रोथ तक किन कामों में मदद करता है?
एनआईएच के अनुसार जिंक एक आवश्यक मिनरल है, जो शरीर में सैकड़ों एंजाइमों की गतिविधियों में योगदान देता है। यह इम्यून सिस्टम को सही तरीके से काम करने, डीएनए और प्रोटीन बनाने तथा कोशिकाओं के विभाजन और वृद्धि में मदद करता है। बचपन और किशोरावस्था में सामान्य विकास के लिए भी इसकी पर्याप्त मात्रा जरूरी होती है।
इसके अलावा, जिंक त्वचा की सामान्य संरचना बनाए रखने, घाव भरने और स्वाद महसूस करने की क्षमता में योगदान देता है। शरीर जिंक को खुद नहीं बना सकता, इसलिए इसे भोजन से प्राप्त करना जरूरी है। इसकी कमी होने पर शरीर की कई प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि यह मिनरल अलग-अलग अंगों और ऊतकों में काम करता है।
बार-बार इंफेक्शन होना जिंक की कमी से कैसे जुड़ सकता है?
खाने का स्वाद या सुगंध कम महसूस होना किस न्यूट्रिशन की कमी का संकेत हो सकता है?
एनसीबीआई के मुताबिक खाने का स्वाद पहले जैसा महसूस न होना या गंध पहचानने में परेशानी होना जिंक की कमी से जुड़ा हो सकता है। जिंक स्वाद और सूंघने की सामान्य क्षमता बनाए रखने में भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर कुछ लोगों को भोजन का स्वाद फीका लग सकता है या खाने में पहले जैसी रुचि नहीं रह सकती।
लेकिन स्वाद या गंध में बदलाव के दूसरे कारण भी हैं। उदाहरण के लिए, सर्दी-जुकाम, नाक और साइनस से जुड़ी समस्याएं, कुछ दवाएं और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां इन इंद्रियों को प्रभावित कर सकती हैं। कोविड-19 जैसे संक्रमणों के दौरान भी स्वाद और गंध में बदलाव देखा गया है।
इसलिए यदि आपको लगातार स्वाद या गंध कम महसूस हो रही है, तो केवल जिंक की कमी मानकर सप्लीमेंट शुरू न करें। डॉक्टर लक्षणों की अवधि, अन्य स्वास्थ्य समस्याओं और जरूरत के अनुसार जांच की मदद से संभावित कारण पता कर सकते हैं।
घाव देर से भरना और त्वचा पर बदलाव Zinc की कमी में क्यों दिखाई दे सकते हैं?
एनआईएच के मुताबिक शरीर में चोट लगने पर त्वचा और उसके नीचे के ऊतकों की मरम्मत शुरू होती है। इस प्रक्रिया में नई कोशिकाओं का निर्माण, प्रोटीन का संश्लेषण और इम्यून सिस्टम की गतिविधियां शामिल होती हैं। जिंक इन प्रक्रियाओं में योगदान देता है। इसलिए इसकी कमी होने पर घाव भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
कुछ लोगों में जिंक की कमी के साथ त्वचा रूखी या खुरदरी हो सकती है और रैश, लालिमा या घाव जैसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं। गंभीर कमी में त्वचा पर सूजन और पपड़ीदार घाव भी विकसित हो सकते हैं। हालांकि, ऐसे लक्षण एक्जिमा, संक्रमण, डायबिटीज, खराब पोषण या दूसरी त्वचा संबंधी समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं।
यदि कोई घाव लंबे समय तक नहीं भर रहा है, उसमें पस आ रही है, लालिमा फैल रही है या दर्द बढ़ रहा है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। खासकर डायबिटीज वाले लोगों को घाव भरने में देरी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जिंक की कमी होने पर उसे ठीक करना उपयोगी हो सकता है, लेकिन जिन लोगों में कमी नहीं है, उनमें अतिरिक्त जिंक लेने से घाव जल्दी भरेंगे, यह निश्चित नहीं है।
क्या बाल झड़ना और नाखूनों में बदलाव Zinc Deficiency के लक्षण हो सकते हैं?
एनसीबीआई के मुताबिक जिंक बालों के सामान्य विकास और त्वचा के स्वास्थ्य में योगदान देता है। इसकी कमी होने पर बाल पतले हो सकते हैं या बाल झड़ने की समस्या बढ़ सकती है। कुछ मामलों में बालों का झड़ना जगह-जगह पैच के रूप में भी दिखाई दे सकता है। नाखूनों में कमजोरी या संरचना से जुड़े बदलाव भी जिंक की कमी के साथ देखे जा सकते हैं।
लेकिन बाल झड़ने की समस्या को केवल जिंक की कमी से जोड़ना सही नहीं है। आयरन की कमी, थायरॉइड की समस्या, आनुवंशिक कारण, तनाव, बीमारी के बाद होने वाला हेयर फॉल और अन्य पोषक तत्वों की कमी भी इसके पीछे हो सकती है। इसी तरह नाखूनों में बदलाव कई बार चोट, फंगल संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़े होते हैं।
Zinc की कमी दूर करने के लिए क्या खाएं?
क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार जिंक की जरूरत पूरी करने के लिए डाइट में इसके अच्छे स्रोत शामिल करना उपयोगी है। मांस, मछली, अंडे और डेयरी उत्पाद जिंक प्रदान कर सकते हैं। शाकाहारी भोजन में दालें, बीन्स, चने, नट्स, बीज और साबुत अनाज भी जिंक के स्रोत हैं। हालांकि, पौधों से मिलने वाले जिंक का अवशोषण कुछ खाद्य पदार्थों में मौजूद फाइटेट के कारण कम हो सकता है।
संतुलित डाइट में अलग-अलग खाद्य समूह शामिल करने से जिंक के साथ अन्य जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। दालों और अनाज को भिगोना, अंकुरित करना या फर्मेंटेशन जैसी पारंपरिक प्रक्रियाएं कुछ खाद्य पदार्थों में फाइटेट की मात्रा कम करने में मदद कर सकती हैं।
जिंक शरीर के इम्यून सिस्टम, कोशिकाओं की वृद्धि, स्वाद और गंध की क्षमता, त्वचा के स्वास्थ्य तथा घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर बार-बार संक्रमण, बाल झड़ना, त्वचा पर बदलाव, भूख में कमी या स्वाद और गंध में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, ये लक्षण दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों में भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर जिंक की कमी का निष्कर्ष न निकालें। संतुलित डाइट लें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच व उपचार की सलाह लें। बिना चिकित्सकीय सलाह के अधिक मात्रा में जिंक सप्लीमेंट लेने से बचें।

