भारत के साथ व्यापार पर बैन के बावजूद पाकिस्तान में भारतीय सामान की मांग तेजी से बढ़ी है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के पहले 3 महीनों (जुलाई-सितंबर) में पाकिस्तान ने भारत से 61.74 मिलियन डालर यानी करीब 5,876 करोड़ रुपए का सामान मंगाया है, जो पिछले साल से 69% ज्यादा है।
पाकिस्तान ने पिछले साल की इसी अवधि में ₹3,478 करोड़ का भारतीय सामान खरीदा था। खास बात यह है कि इस दौरान पाकिस्तान से भारत में एक रुपए का भी सामान नहीं आया यानी भारत का आयात पूरी तरह शून्य रहा। 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच डायरेक्ट ट्रेड यानी सीधा व्यापार पूरी तरह बंद है।
पाकिस्तान में भारतीय सामानों की डिमांड ज्यादा और सप्लाई की कमी है। इसलिए वाघा-अटारी बॉर्डर वाला सीधा रास्ता बंद होने के बाद व्यापारी 'तीसरे देशों' के जरिए सामान मंगा रहे हैं।
स्टेप 1 (ग्रे-जोन स्ट्रैटेजी): भारत से सामान सीधा पाकिस्तान न भेजकर पहले दुबई, सिंगापुर या श्रीलंका (कोलंबो) भेजा जाता है।
स्टेप 2 (लेबल बदलना): इन देशों के गोदामों में सामान का डिब्बा और कागजात बदल दिए जाते हैं। 'मेड इन इंडिया' का ठप्पा हटाकर उस पर यूएई या सिंगापुर का लेबल लगा दिया जाता है।
स्टेप 3 (पाकिस्तान डिलीवरी): नया लेबल लगने के बाद वही सामान कानूनी रूप से दूसरे देश का बताकर पाकिस्तान पहुंचा दिया जाता है।
GTRI की रिपोर्ट: अनऑफिशियल ट्रेड सालाना $10 अरब तक पहुंचने का अनुमान
थिंक टैंक 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, तीसरे देशों के रास्ते भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला अनऑफिशियल एक्सपोर्ट सालाना $10 बिलियन (लगभग ₹83,000 करोड़) से ज्यादा हो सकता है।
सीधे व्यापार पर पाबंदी होने के कारण पाकिस्तानी उपभोक्ताओं को यही भारतीय सामान री-लेबलिंग और अतिरिक्त भाड़े की वजह से काफी ऊंची कीमतों पर खरीदना पड़ रहा है।

