ढाका: बांग्लादेश में क्या 'विरोधियों को गोली मारने' वाले कानून को फिर से लागू करने की तैयारी की जा रही है? ये सवाल तब उठ हैं जब बांग्लादेशी पुलिस के प्रमुख IGP मो. अली हुसैन फकीर ने 'क्रासफायर' प्रथा को फिर से शुरू करने की बात कही है। उन्होंने ढाका के चौकबाजार में आयोजित एक कार्यक्रम में इस प्रथा को सरकार की इजाजत मिलने पर फिर से शुरू करने की बात कही है।


बांग्लादेश में 'क्रॉसफायर' के नाम से खौफ क्यों?

  • प्रधानमंत्री तारिक रहमान की मां बेगम खालिदा जिया जब प्रधानमंत्री थीं उस वक्त 'क्रॉसफायर' को लागू किया गया था।

  • इसके तहत कानून कायम करने के लिए बदमाशों को गोली मारने वाला कानून लागू किया गया था। लेकिन बाद में एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग्स यानि बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्या करने में इसका इस्तेमाल होने लगा।

  • आरोप लगे कि बेगम खालिदा जिया के शासनकाल में इस कानून के तहत भारी संख्या में राजनीतिक विरोधियों का सफाया कर दिया गया।

IGP मो. अली हुसैन फकीर ने ढाका में मीडिया से बात करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकारी मंजूरी मिलने पर सुरक्षा एजेंसियां ​​इस तरीके का सहारा ले सकती हैं। उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश में बवाल शुरू हो गया है। हालांकि सोमवार शाम बांग्लादेशी पुलिस हेडक्वार्टर की तरफ से सफाई जारी की गई।

बांग्लादेशी पुलिस हेडक्वार्टर ने 'क्रॉसफायर' पर क्या सफाई दी

ढाका पुलिस मुख्यालय से विवाद बढ़ने पर एक बयान जारी किया गया और कहा गया कि IGP मो. अली हुसैन फकीर के बयान का वो मतलब नहीं था जो समझा जा रहा है। बयान में कहा गया है कि उनका मतलब 'एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग' (न्यायेतर हत्या) से नहीं था। पुलिस मुख्यालय ने कहा कि IGP सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बने नशा तस्करों, आतंकवादियों, जबरन वसूली करने वालों और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के अपने संकल्प को व्यक्त कर रहे थे।

बयान में कहा गया 'उन्होंने कानून लागू करने में सख्ती दिखाने के लिए 'क्रॉसफायर' शब्द का इस्तेमाल इसके शाब्दिक अर्थ में किया था। उनका मतलब 'एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग' या न्यायिक प्रक्रिया से बाहर किसी सजा से नहीं था।' लेकिन बांग्लादेश के राजनीतिक दलों और संगठनों ने इस बयान की आलोचना की और इसे वापस लेने की मांग की।

बांग्लादेश में 'क्रॉसफायर' का खतरनाक इतिहास

  • बांग्लादेश में 'क्रॉसफायर' शब्द अपराध विरोधी स्पेशल फोर्स 'रैपिड एक्शन बटालियन' (RAB) से जुड़ा है जिसका नाम हाल ही में बदला गया है।

  • पुलिस ऐसी मौतों के पीछे 'गोलीबारी के दौरान दुर्घटना' नाम देती। उनका दावा होता है कि जब अपराधी पुलिस टीम पर हमला करते हैं तो जवाबी कार्रवाई की जाती है और 'क्रॉसफायर' यही है।

  • मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक दलों ने ने RAB की तरफ से गैर-न्यायिक हत्याओं की बार-बार आलोचना की है खासकर शेख हसीना सरकार के दौरान। हालांकि शेख हसीना ने इसे लागू नहीं किया था।

बांग्लादेश में गैर-न्यायिक हत्याओं के सबसे शुरुआती और चर्चित मामलों में से एक अति-वामपंथी माओवादी नेता सिराज सिकदर से जुड़ा है। 1975 में पुलिस हिरासत में उनकी मौत हो गई थी और बाद में उनकी मौत की परिस्थितियों की तुलना 'क्रॉसफायर' की घटनाओं से की गई। मार्च 2004 में प्रधानमंत्री खालिदा जिया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार के दौरान 'विशेष अपराध-विरोधी बल' का गठन किया गया था और उसके बाद से ही देश के सुरक्षा तंत्र में 'क्रॉसफायर' शब्द का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होने लगा।