सिंह ने ET को बताया, "जब वेणु श्रीनिवासन ने पत्र लिखा था, मैंने भी उसी समय चैरिटी कमिश्नर को चिट्ठी लिखकर अपनी चिंताएं जताई हैं।" टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन और टाटा संस बोर्ड में इसके जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर श्रीनिवासन ने भी महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को पत्र लिखकर नोएल टाटा की परपेचुअल ट्रस्टी के तौर पर नियुक्ति और उनके पद पर बने रहने की स्थिति की जांच की मांग की है।
कार्रवाई की मांग
सिंह ने इस बात की भी जांच करने की मांग की कि श्रीनिवासन को अहम फैसलों की प्रक्रिया से क्यों अलग रखा गया। साथ ही उन्होंने टाटा संस के कमर्शियल और स्ट्रैटेजिक मामलों में SDTT और उसके ट्रस्टियों की भागीदारी की जांच की मांग की है। उन्होंने टाटा संस से जुड़े मामलों में SDTT और टाटा ट्रस्ट्स की बढ़ती भागीदारी पर चिंता जताई है।चैरिटी कमिश्नर को लिखे पत्र में सिंह ने कहा, "टाटा संस में SDTT की बड़ी हिस्सेदारी का मतलब यह नहीं हो सकता कि ट्रस्ट किसी कमर्शियल कंपनी की तरह काम करने लगे या टाटा संस के बिजनेस मामलों में सीधे तौर पर शामिल हो।" सिंह ने ऐसी भागीदारी से टैक्स से जुड़े संभावित असर की ओर भी इशारा किया।
टैक्स छूट पर खतरा
उन्होंने इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के उन प्रावधानों का हवाला दिया जो रजिस्टर्ड नॉन-प्रॉफिट संगठनों की कमर्शियल गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। उन्होंने तर्क दिया है कि ट्रस्ट के चैरिटेबल उद्देश्यों से सीधे तौर पर जुड़ी न होने वाली गतिविधियां उसके टैक्स रजिस्ट्रेशन और छूट को खतरे में डाल सकती हैं।सिंह ने कहा, "टाटा संस में SDTT की हिस्सेदारी की बड़ी वैल्यू को देखते हुए, ट्रस्ट और उसके चैरिटेबल फंड पर इसके बहुत बड़े असर हो सकते हैं।" श्रीनिवासन और सिंह की ओर से दी गई दो अर्जियां अब महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास हैं। इस बीच बुधवार को टाटा ट्रस्ट्स ने भी चैरिटी कमिश्नर के सामने एक अर्जी दी। इसमें कहा गया कि शिकायतों पर कोई भी फैसला लेने से पहले उनकी बात सुनी जाए।
