आरबीआई ने कहा, ‘येन और यूरो जैसी प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से मूल्यांकन लाभ 90 करोड़ डॉलर रहा। मूल्यांकन प्रभाव को हटाने पर जून, 2026 के अंत में बाहरी कर्ज में 15.4 अरब डॉलर के बजाय 16.4 अरब डॉलर की वृद्धि होती।’
डॉलर में बड़ा हिस्सा
जून तिमाही में एक साल से अधिक की मूल परिपक्वता अवधि वाला दीर्घकालिक ऋण 624.7 अरब डॉलर रहा। यह मार्च, 2026 के मुकाबले 11.2 अरब डॉलर अधिक है। वहीं, कुल बाहरी कर्ज में एक साल तक की मूल परिपक्वता अवधि वाले अल्पकालिक ऋण की हिस्सेदारी जून, 2026 के अंत में बढ़कर 19.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही के अंत में 19.6 प्रतिशत थी।इसी तरह, विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में अल्पकालिक ऋण का अनुपात जून, 2026 के अंत में बढ़कर 23% हो गया, जो मार्च, 2026 के अंत में 21.6% था। आरबीआई के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में ऋण भारत के बाह्य ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा रहा। जून, 2026 के अंत में इसकी हिस्सेदारी 54.8% थी। इसके बाद भारतीय रुपये में ऋण की हिस्सेदारी 29.8%, येन 6.9%, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 4.1% और यूरो की हिस्सेदारी 3.5% रही।
