छत्तीसगढ़ बीजेपी की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी आज रायपुर पहुंची। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत सादगी से किया गया। संगठन की ओर से नामित 16 पदाधिकारी और विधायक स्वागत के लिए पहुंचे। इस दौरान न तो ढोल-ताशे बजाए गए और न ही किसी मंत्री को बुलाया गया।
स्वागत के लिए प्रस्तावित भाजयुमो की बाइक रैली भी स्थगित कर दी गई। एयरपोर्ट से स्मृति ईरानी भाजपा कार्यालय पहुंची। यहां भी सादगी के साथ उनका स्वागत किया गया। वहीं स्मृति ईरानी के निर्देश पर बीजेपी कार्यालय के भीतर से पुलिस सुरक्षा हटाई गई है।
वहीं एक कार्यकर्ता स्मृति ईरानी के साथ सेल्फी लेना चाह रही थीं। इस पर स्मृति ईरानी ने प्यार से उनके सिर पर हाथ रखा और सेल्फी लेने से मना कर दिया। स्मृति ईरानी के साथ प्रदेश सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू भी छत्तीसगढ़ पहुंचे।
दोनों नेता 25 और 26 अक्टूबर को प्रदेश भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में संगठन और जनप्रतिनिधियों के साथ कुल 12 बैठकों में शामिल होंगे।
स्मृति ईरानी के साथ एक महिला कार्यकर्ता सेल्फी लेना चाह रही थीं। इस पर स्मृति ईरानी ने प्यार से उनके सिर पर हाथ रखा और सेल्फी लेने से मना कर दिया।
भाजपा नेता पुलिस को समझाते नजर आए, वहीं पुलिस भी असमंजस की स्थिति में दिखी। परिसर से ज्यादातर पुलिस बल को बाहर कर दिया गया।
स्मृति ईरानी के सादगी पूर्ण स्वागत पर पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने कहा कि ये हमारा कल्चर है। वीआईपी कल्चर स्थाई नहीं रहता, कार्यकर्ता स्थाई रहता है।
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी स्वागत है। उनका अनुभव प्रदेश के लिए काम आएगा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कहा कि संगठन के विषयों पर चर्चा की जाएगी।
प्रदेश भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में संगठन और जनप्रतिनिधियों के साथ कुल 12 बैठके होंगी।
छत्तीसगढ़ भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी रायपुर पहुंचीं। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत सादगी से किया गया। संगठन की ओर से नामित 16 पदाधिकारी और विधायक स्वागत के लिए पहुंचे। इस दौरान न तो ढोल-ताशे बजाए गए और न ही किसी मंत्री को बुलाया गया। स्वागत के लिए प्रस्तावित भाजयुमो की बाइक रैली भी स्थगित कर दी गई। एयरपोर्ट से भाजपा कार्यालय तक पार्टी के झंडे लगाए गए हैं।
प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी 2 दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। वे सरकार और संगठन के कामकाज की समीक्षा करेंगी।
संगठन का जमीनी फीडबैक अहम होगा
बैठकों में मंत्रियों के विभागीय कामकाज के साथ संगठन का जमीनी फीडबैक भी अहम रहेगा। पार्टी का फोकस 2023 के विधानसभा चुनाव में हारी हुई 36 सीटों पर रहेगा।
इन क्षेत्रों में संगठन की स्थिति, बूथ समितियों की सक्रियता और पन्ना प्रमुखों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। इसके जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि पिछली बार इन सीटों पर पार्टी कहां कमजोर रही और आगामी चुनाव से पहले किन स्तरों पर सुधार की जरूरत है।
विभागों में कितना काम, कितने लक्ष्य पूरे?
मंत्रियों से उनके विभागों की उपलब्धियों का ब्योरा लिए जाने पर सबसे अहम सवाल योजनाओं की घोषणा और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच का अंतर होगा। विभाग ने अब तक कौन-कौन से लक्ष्य पूरे किए, कितने काम लंबित हैं और किन परियोजनाओं में देरी हो रही है, इसकी जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
साथ ही मोदी की गारंटी के कितने काम हुए और इसके लिए विभागीय योजनाओं की प्रगति, स्वीकृत और पूर्ण परियोजनाओं, बजट के उपयोग और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने की स्थिति का विवरण मांगा जा सकता है। जिन योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, उनमें देरी के कारण और उन्हें पूरा करने की समय सीमा भी तय की जा सकती है।
इसके अलावा विभाग से जुड़े विवाद, लंबित मामले, जनता की शिकायतें और प्रशासनिक स्तर पर आ रही अड़चनें भी कामकाज की तस्वीर समझने में अहम होंगी। इससे उपलब्धियों के साथ उन क्षेत्रों की पहचान भी की जा सकती है, जहां सुधार की जरूरत है।
प्रभार वाले जिलों का भी देना पड़ सकता है हिसाब
मंत्रियों को जिलों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। ऐसे में उनके कामकाज का आकलन केवल विभागीय प्रदर्शन से नहीं, बल्कि प्रभार वाले जिलों में उनकी सक्रियता से भी जुड़ सकता है।
उनसे जानकारी ली जा सकती है कि मंत्री नियमित रूप से जिलों में जा रहे हैं या नहीं, मासिक बैठकें हो रही हैं या नहीं और कार्यकर्ताओं तथा जनता की समस्याओं पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों, विधायकों और सांसदों से भी फीडबैक लिया गया था।
बैठक में मंत्रियों से उनके प्रभार वाले जिलों में की गई बैठकों, उठाए गए मुद्दों और समस्याओं के समाधान की जानकारी मांगी जा सकती है। मसलन, पिछले कुछ महीनों में कितने दौरे किए, जिला संगठन के साथ कितनी बैठकें हुईं, कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और प्रशासनिक समस्याओं को दूर करने के लिए क्या पहल की गई।
मंत्री की रिपोर्ट और संगठन का फीडबैक
मंत्री अपने कामकाज का ब्योरा देंगे, लेकिन जिला स्तर पर संगठन की स्थिति की जानकारी जिलाध्यक्षों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पास भी होती है। ऐसे में दोनों स्तरों से मिली जानकारी को साथ रखकर देखने से सरकार और संगठन के बीच तालमेल की स्थिति समझी जा सकती है।
यदि किसी मंत्री की ओर से जिले में नियमित बैठकों और समस्याओं के समाधान का दावा किया जाता है, तो स्थानीय संगठन से मिलने वाला फीडबैक उस तस्वीर को और स्पष्ट कर सकता है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी, प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय की समस्या और जनता से जुड़े लंबित मुद्दे भी इस आकलन के महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं।
सरकारी योजनाओं के प्रचार का भी हिसाब
सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना केवल प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि संगठनात्मक जनसंपर्क से भी जुड़ा है। ऐसे में नेताओं की सोशल मीडिया गतिविधियां और सरकारी योजनाओं के प्रचार में उनकी भूमिका भी समीक्षा का हिस्सा हो सकती है।
बीजेपी नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार को लेकर जानकारी मांगने की बात भी कही जा रही है।
2028 से पहले संगठन को सक्रिय रखने की तैयारी
स्मृति ईरानी के दो दिवसीय दौरे में सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से बातचीत प्रस्तावित है। इन बैठकों के जरिए पार्टी सरकार के कामकाज और संगठन की गतिविधियों की स्थिति समझ सकती है। साथ ही आगामी चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक प्राथमिकताओं पर चर्चा भी हो सकती है।
दौरे के बाद यह स्पष्ट होगा कि पार्टी किन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने पर जोर देती है और क्या बूथ स्तर तक कामकाज की समीक्षा के लिए कोई समयसीमा या नई जिम्मेदारी तय की जाती है।
36 सीटों पर संगठन की स्थिति समझने की चुनौती
2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 में से 54 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। बाकी 36 सीटों पर पार्टी को हार मिली थी। आगामी विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में पिछली बार पार्टी को सफलता नहीं मिली, वहां संगठन की स्थिति और चुनावी चुनौतियों को समझना महत्वपूर्ण होगा।
इन सीटों पर हार के कारण हर जगह एक जैसे नहीं थे। कहीं स्थानीय मुद्दे महत्वपूर्ण थे, तो कहीं उम्मीदवार, संगठन की सक्रियता या बूथ स्तर पर कमजोरियां प्रभावी रही।
विधानसभा क्षेत्रवार समीक्षा से इन अलग-अलग परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। लिहाजा ये माना जा रहा है कि इन 36 सीटों की समीक्षा बैठक में की जा सकती है।
बूथ और पन्ना प्रमुखों के पुर्नगठन का प्लान तैयार होगा
चुनाव में बूथ स्तर का संगठन पार्टी की रणनीति को मतदाताओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बूथ समितियां स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने, मतदाताओं से संपर्क बनाने और पार्टी के कार्यक्रमों को जमीन पर लागू करने का काम करती हैं। वहीं पन्ना प्रमुखों की जिम्मेदारी मतदाता सूची के निर्धारित हिस्से में मतदाताओं से संपर्क बनाए रखने की होती है।
इसलिए प्रदेश प्रभारी बूथ समिति के पुर्नगठन के लिए एक्शन प्लान तैयार करके देंगी। इसके लिए बूथ पर विशेष सदस्यों का गठन किया जा सकता है।
समीक्षा के बाद तय हो सकती हैं प्राथमिकताएं
स्मृति ईरानी के दौरे में सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से अलग-अलग चर्चा की योजना है। ऐसे में बैठकों से सरकार के कामकाज, संगठन की सक्रियता और आगामी चुनाव की तैयारियों को लेकर पार्टी की प्राथमिकताओं के संकेत मिल सकते हैं।
मंत्रियों के विभागीय प्रदर्शन, प्रभार वाले जिलों में सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और हारी हुई सीटों पर संगठन की स्थिति जैसे विषयों पर मिली जानकारी के आधार पर आगे के काम तय किए जा सकते हैं। लेकिन समीक्षा के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव होगा या किसी नेता को नई जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
फिलहाल इस दौरे का महत्वपूर्ण पहलू यही रहेगा कि पार्टी सरकार और संगठन के कामकाज का आकलन किन आधारों पर करती है और सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

