हूतियों की बढ़त से बढ़ी चिंता
यह नया सहयोग सऊदी अरब और UAE के बीच गहरी दूरियों को करने की कोशिश है। इसकी बड़ी वजह यह है कि हाल ही में पश्चिमी तट समेत पूरे यमन में हूती बलों की बढ़त ने रियाद और अबू धाबी को चिंतित कर दिया है। सऊदी अरब को रोजाना हूतियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह से सऊदी के हवाई अड्डे और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे ठप हो गए हैं। इससे रियाद के लिए देश में सामान्य स्थिति बनाए रखना मुश्किल हो गया है।सऊदी और UAE के गठबंधन में दरार
हालांकि, सऊदी अरब और UAE के बीच यह समझौता काफी कमजोर है और इसके पीछे हूती विरोधी खेमे के भीतर की पुरानी दरारें छिपी हुई हैं। यमन के दक्षिणी बलों को पहले UAE से भारी मदद मिलती थी, जिनमें जायंट्स ब्रिगेड सबसे प्रमुख है। हूतियों के खिलाफ बने सैन्य गठबंधनों में इसे सबसे प्रभावी बल माना जाता है।दिसम्बर 2025 में दक्षिणी मिलिशिया ने अदन और दक्षिणी इलाकों पर नियंत्रण स्थापित करने के इरादे से अभियान शुरू किया था। इसके जवाब में सऊदी अरब ने भारी हवाई हमले किए और अपनी सेना तैनात कर दी। सऊदी अरब ने UAE पर दक्षिणी मिलिशिया को हथियार देने का आरोप लगाया और तत्काल समर्थन रोकने की मांग की। इस साल जनवरी में सऊदी के साथ तनाव के बाद UAE ने यमन के भीतर अभियान रोक दिए। इसके साथ ही दक्षिणी बलों के लिए फंडिंग भी रोक दी।



