वहीं ईरानी विदेश मंत्रालयके प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने शनिवार को बताया कि तकनीकी समस्याओं और एहतियाती उपायों के कारण ईरान और पाकिस्तान के बीच सीमा पार आवाजाही और लेन-देन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक बघाई ने पुष्टि की कि दोनों देशों के अधिकारी तकनीकी बाधाओं को दूर करने और सीमा पार आवाजाही को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लाने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं।
अमेरिका की वजह से पाकिस्तान ने ईरान सीमा बंद किया?
ईरान ने तकनीकी वजहों को जिम्मेदार बताया है लेकिन 'तुर्की टुडे' ने इसके पीछे अमेरिकी प्रेशर को जिम्मेदारबताया है। इसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका, तुर्की और पाकिस्तान के साथ मिलकर ईरान के जमीनी व्यापार मार्गों को बंद करने पर काम कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसे तेहरान को पूरी तरह से अलग थलग करने वाला अभियान कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वाशिंगटन ईरान की लगभग 1 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी को जब्त कर सकता है।वाशिंगटन में 'न्यूजमैक्स एनपॉलिसी समिट' के दौरान ग्रेटा वैन सुस्टरेन को दिए एक इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा 'संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक अच्छा साझेदार रहा है। ओमान भी एक अच्छा साझेदार रहा है। हम पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर सभी ज़मीनी रास्तों को बंद करने के लिए काम कर रहे हैं।'
समुद्र के बाद ईरान की जमीनी नाकेबंदी
ईरान के पड़ोसी देश तुर्की और पाकिस्तान, ईरानी व्यापार के लिए मुख्य ज़मीनी गलियारे हैं। इन देशों का साथ मिलने से ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की तरफ से लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदीअब जमीनी स्तर तक भी फैल जाएगी। बेसेंट की इन टिप्पणियों पर न तो अंकारा और न ही इस्लामाबाद की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है। बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन ने ईरान को एक तरह से क्वारंटाइन कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब IRGC के सदस्य 'लंदन में अपने प्लास्टिक सर्जन, पेरिस में अपनी गर्लफ्रेंड और जिनेवा में रखे अपने पैसों' के पास नहीं जा सकते।दिवालिया होने के कगार पर तेहरान के बाजार
तेहरान में 'एजेंस फ्रांस-प्रेस' (AFP) से बात करने वाले दुकानदारों का कहना है कि युद्ध और नाकेबंदी की वजह से मांग बुरी तरह घट गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सितंबर में महंगाई दर सालाना आधार पर लगभग 90% तक पहुंच गई और पिछले साल के मुकाबले खाने-पीने की चीजों की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं।तजरीश बाजार में स्पोर्ट्सवियर की दुकान चलाने वाले 36 वर्षीय अली नौरुजी ने AFP से कहा 'यह अस्तित्व बचाने की एक हताश कोशिश है। निर्माता दिवालिया हो रहे हैं, कर्मचारियों को काम से निकाल रहे हैं और अपनी दुकानें बंद कर रहे हैं। इसका असर हम पर भी पड़ना तय है। हमें बस थोड़ी स्थिरता चाहिए।'



