सीएनबीसी मेक इट की रिपोर्ट के मुताबिक, अखिबी ने जुलाई 2024 में Peak and Pace नाम से इस कम्युनिटी की शुरुआत की थी। उस समय वह जेपी मॉर्गन में एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग सेल्स के क्षेत्र में काम कर रहे थे। लंदन से न्यूयॉर्क आने के बाद वह नए दोस्त बनाना चाहते थे। इसी सोच ने उन्हें रनिंग क्लब शुरू करने का आइडिया दिया।
बिजनेस में बदल गया मौका
शुरुआत में अखिबी का मकसद लोगों को दौड़ने के बहाने एक-दूसरे से जुड़ने का मौका देना था। लेकिन धीरे-धीरे यह पहल एक बड़े सोशल फिटनेस बिजनेस में बदल गई। साल 2025 में क्लब के अलग-अलग इवेंट में करीब 30,000 लोगों ने हिस्सा लिया।कैसे आया आइडिया?
ओवेन अखिबी ने अपने क्लब में दौड़ने के लिए लोगों से कोई फीस नहीं ली। उन्होंने समझा कि लोगों को एक साथ लाने के बाद उनके लिए दूसरे सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं, जिनमें हिस्सा लेने के लिए लोग पैसे देने को तैयार होंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने रनिंग क्लब के अलावा पार्टियां, कॉमेडी नाइट्स और दूसरी गतिविधियां आयोजित करना शुरू किया।Peak and Pace के रनिंग सेशन आज भी मुफ्त हैं, लेकिन इसके पेड इवेंट में शामिल होने के लिए लोगों को टिकट खरीदना पड़ता है। इन कार्यक्रमों के टिकट की कीमत 15 से 25 डॉलर (1434 से 2391 रुपये) के बीच होती है। इस बिजनेस मॉडल का फायदा यह हुआ कि लोगों को क्लब की मुख्य गतिविधि यानी दौड़ने के लिए पैसे नहीं देने पड़ते, जबकि आयोजनों से कमाई का रास्ता खुल गया।
150 लोगों तक पहुंचा क्लब
पीक एंड पेस की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ने लगी। बताया जाता है कि क्लब के पांचवें रनिंग सेशन तक करीब 150 लोग इसमें शामिल होने पहुंच गए थे। सोशल मीडिया ने भी क्लब की गतिविधियों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।इसके बाद अखिबी ने मैनहैटन के एक बार में पार्टी आयोजित की, जिसके टिकट की कीमत 20 डॉलर रखी गई थी। इस प्रयोग से उन्हें समझ आया कि रनिंग क्लब से जुड़ा समुदाय दूसरे आयोजनों में भी दिलचस्पी रखता है। फिर उन्होंने क्लब की गतिविधियों का दायरा बढ़ाया। पार्टियों के अलावा लोगों के लिए हाइकिंग ट्रिप और न्यूयॉर्क से बाहर स्कीइंग ट्रिप जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने लगे। इस तरह मुफ्त रनिंग क्लब लोगों को जोड़ने का माध्यम बना, जबकि पेड इवेंट कमाई का जरिया बन गए।
6 करोड़ रुपये का रेवेन्यू
पीक एंड पेस ने साल 2025 में 6.40 लाख डॉलर यानी करीब 6 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाया। इसकी लगभग पूरी कमाई टिकट वाले कार्यक्रमों से आई। हालांकि, रेवेन्यू का मतलब पूरा मुनाफा नहीं होता। कार्यक्रम आयोजित करने में भी खर्च आता है। अखिबी के मुताबिक, कुछ पार्टियों में नुकसान भी होता है, लेकिन पूरे बिजनेस का प्रॉफिट मार्जिन करीब 15% है।इस हिसाब से 6.40 लाख डॉलर के रेवेन्यू पर 15% मार्जिन मानें, तो मुनाफा करीब 96000 डॉलर यानी लगभग 92 लाख रुपये के आसपास बैठता है। यह अनुमानित रकम है, कंपनी के अलग से बताए गए वास्तविक मुनाफे का आंकड़ा नहीं।
