हालांकि नोटों की संख्या कई चीजों पर निर्भर करती है। जैसे जीडीपी ग्रोथ, महंगाई और ब्याज दरें। लेकिन RBI पॉलीमर का इस्तेमाल करके नोटों की उम्र बढ़ाकर करेंसी की लागत को कम करने की कोशिश कर रहा है।
भारत में कुल कितने नोट?
मुर्मू ने कहा, "पिछले कुछ साल में हमने हर साल छह अलग-अलग वैल्यू वाले 28 से 30 अरब नोट छापे हैं और लगभग 21 अरब नोट हर साल हटाए हैं। आज भारत में 176 अरब नोट चलन में हैं। इसकी तुलना में, पिछले साल के आखिर में लगभग 56 अरब अमेरिकी डॉलर के नोट और 30 अरब यूरो के नोट चलन में थे।"उन्होंने कहा कि यह तुलना आंशिक रूप से भारत में अलग-अलग वैल्यू वाले नोटों के मिक्स को दिखाती है। इनमें कम वैल्यू वाले नोट ज्यादा हैं और इसलिए उतनी ही वैल्यू के ट्रांजैक्शन के लिए ज्यादा नोटों की जरूरत होती है।
कैसे नोट बांटता है RBI?
मूर्मू ने 13 अगस्त को जकार्ता में बैंक इंडोनेशिया द्वारा आयोजित कैश मैनेजमेंट कॉन्फ्रेंस में कहा कि नोटों की यह संख्या हमें उस लॉजिस्टिक्स के पैमाने का अंदाजा देती है जिसे हम रोजाना मैनेज करते हैं।RBI अपने 19 क्षेत्रीय कार्यालयों और कमर्शियल तथा कोऑपरेटिव बैंकों और सरकारी ट्रेजरी द्वारा चलाए जा रहे करेंसी चेस्ट के नेटवर्क के जरिए करेंसी बांटता है। करेंसी आम लोगों तक बैंक शाखाओं, 2,50,000 से ज्यादा ATM, कैश डिस्पेंसर और ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में लाखों बिजनेस करेस्पोंडेंट के जरिए भी पहुंचती है।
