'अमेरिकी कर्मचारियों को जॉब से निकाला तो', जेडी वेंस ने H-1B वीजा पर दी चेतावनी, भारतीयों को झटका?
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28 Sep 2026, 11:41 AM
वॉशिंगटन: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन कंपनियों के खिलाफ सख्ती की बात कही है, जो अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर H-1B के तहत विदेशी वर्कर की मांग करती हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब ट्रंप प्रशासन वीजा धारकों पर शिकंजा कस रहा है, जिससे उनके लिए अमेरिका में काम करना मुश्किल हो रहा है। इससे खासतौर पर भारतीय पेशेवरों की चिंता बढ़ी है क्योंकि अमेरिका के H-1B वीजा का लाभ सबसे ज्यादा भारतीय कामगारों को मिलता रहा है।अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि उनकी सरकार ऐसे तरीकों पर विचार कर रही है, जिनसे कंपनियों को अमेरिकी वर्कफोर्स में कटौती करते हुए वर्कर की कमी का दावा करने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि कई कंपनियां H-1B के लिए आवेदन करते हुए कहती है कि हमें वर्कर नहीं मिल रहे हैं। फिर जब आप उनका इतिहास देखते हैं तो पता चलता है कि उन्होंने 5,000 लोगों को नौकरी से निकाल दिया है।'अमेरिकियों को नहीं निकाल सकते'
वेंस ने आगे कहा, 'अगर कोई कंपनी अमेरिकी वर्कर को नौकरी से निकाल रही है तो उसे उनकी जगह विदेशी वर्कर को नहीं लाना चाहिए। H-1B वीजा प्रोग्राम अमेरिकी वर्कर की जगह लेने के लिए नहीं है। H-1B का मकसद कम वेतन वाले विदेशियों से अमेरिकी वर्कर को बदलना नहीं होना चाहिए। इसका मकसद अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना होना चाहिए।'इसी महीने, 18 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, जिसमें फेडरल एजेंसियों को H-1B याचिकाओं की समीक्षा करते समय नियोक्ता की ओर से गई छंटनी पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। इसमें H-1B प्रोग्राम को लागू करते समय इस पर जोर दिया गया है कि नियोक्ता ने अमेरिकी वर्कर को तो नौकरी से नहीं निकाला है।हमने H-1B वीजा सिस्टम में हो रही धोखाधड़ी पर गौर किया और कांग्रेस के कानून बदलने का इंतजार करने के बजाय प्रशासनिक बदलाव करने का फैसला किया।
जेडी वेंस
भारतीयों पर क्या होगा असर
अमेरिका के H-1B वीजा प्रोग्राम के तहत देश की कंपनियां टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, शिक्षा और रिसर्च जैसे खास क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों को काम पर रख सकती हैं। अमेरिका हर साल 65,000 रेगुलर H-1B वीजा और एडवांस्ड डिग्री वाले कर्मचारियों के लिए 20,000 वीजा जारी करता है। वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका का H-1B वीजा पाने वाले 70 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी भारत से थे।ट्रंप प्रशासन ने इस वीजा को हासिल करना महंगा और मुश्किल बना दिया है। साथ ही कंपनियों पर भी निगरानी बढ़ाई है। फीस में बढ़ोतरी और कंपनियों पर निगरानी का सबसे ज्यादा असर साफतौर पर भारतीयों पर पड़ेगा। ये वीजा सबसे ज्यादा भारतीय पाते हैं तो इसका असर भी उन पर ज्यादा होगा। सख्त नियमों से अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखना मुश्किल हो जाएगा।