वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो करीब 10 महीने बाद अपने देश लौट आई हैं। नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद वे पिछले साल देश छोड़कर चली गई थीं।
अब वापसी के बाद मचाडो देश में चुनाव कराने और सत्ता बदलने की मांग कर रही हैं। उनके लौटने के बाद उनकी पार्टी ने कुछ तस्वीरें जारी कीं। इनमें वे लारा राज्य के एक चर्च में अपने समर्थकों से मिलती दिखीं। समर्थकों ने उन्हें गले लगाया। इसके बाद मचाडो राजधानी कराकस के लिए रवाना हो गईं।
दिसंबर 2025 में वह नोबेल शांति पुरस्कार लेने के लिए छिपकर वेनेजुएला से निकलकर नॉर्वे गई थीं। इसके बाद वह कुछ समय अमेरिका में रहीं। हाल के महीनों में वह ज्यादातर पनामा की राजधानी पनामा सिटी में रह रही थीं।
सात बार देश लौटने की कोशिश नाकाम रही
मचाडो की पार्टी से जुड़े लोगों ने बताया कि वे इससे पहले कम से कम सात बार देश लौटने की कोशिश कर चुकी थीं, लेकिन सफल नहीं हो पाई थीं।
मचाडो के लिए देश लौटना मुश्किल था, क्योंकि उनका सरकार के साथ राजनीतिक टकराव चल रहा है। उनके देश लौटने पर गिरफ्तारी का खतरा था।
मचाडो राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार की प्रमुख विरोधी रही हैं। सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई की थी और उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई थी।
अमेरिकी अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से उन्हें जल्दबाजी में नहीं लौटने की सलाह दी थी। इसके बाद अमेरिका ने पनामा और कोलंबिया की सरकारों के बीच तालमेल बनाकर उनके लौटने की राह बनाई।
रॉयटर्स के मुताबिक, मचाडो निजी विमान से पनामा से कोलंबिया पहुंचीं। इसके बाद 25 अक्टूबर को वे सड़क के रास्ते वेनेजुएला आईं।
मचाडो अगले साल चुनाव लड़ना चाहती हैं
2024 के पिछले राष्ट्रपति चुनाव में मचाडो खुद उम्मीदवार नहीं बन पाई थीं। सरकार ने उन पर 15 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद उन्होंने अपनी जगह एडमंडो गोंजालेज को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें विपक्ष का समर्थन हासिल था। विपक्ष का दावा है कि गोंजालेज ने चुनाव जीता था, लेकिन सरकार ने निकोलस मादुरो को विजेता घोषित कर दिया।
मचाडो चाहती हैं कि वेनेजुएला में अगले साल जुलाई तक चुनाव करा लिए जाएं। वे खुद भी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ना चाहती हैं।
फिलहाल देश की अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिगेज हैं। उन्होंने कहा है कि देश में चुनाव होंगे, लेकिन अभी इसकी तारीख नहीं बताई है।
मादुरो के पकड़े जाने के बाद सत्ता बदली
अमेरिकी सेना ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया था। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम नेता के तौर पर समर्थन दिया।
मचाडो के अमेरिका के कई नेताओं से पुराने संबंध रहे हैं। इसके बावजूद ट्रम्प सरकार ने उन्हें सत्ता सौंपने के बजाय रोड्रिगेज का साथ दिया। ट्रम्प कई बार रोड्रिगेज की तारीफ भी कर चुके हैं। हालांकि उनका कहना है कि वेनेजुएला अभी चुनाव कराने के लिए तैयार नहीं है।
अमेरिका वेनेजुएला के तेल और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े समझौते भी कर रहा है। मचाडो इन समझौतों का विरोध कर चुकी हैं।
ट्रम्प बोले- उम्मीद है मचाडो सुरक्षित होंगी
मचाडो की वापसी के बारे में पूछे जाने पर ट्रम्प ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने मचाडो को अच्छी महिला बताया और उम्मीद जताई कि वे सुरक्षित होंगी। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका वेनेजुएला में अच्छा काम कर रहा है।
मचाडो पहले ट्रम्प को अपना नोबेल शांति पुरस्कार देने की बात कह चुकी हैं। हालांकि, वेनेजुएला में सत्ता किसके हाथ में हो और चुनाव कब कराए जाएं, इसे लेकर दोनों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वेनेजुएला की सरकार और विपक्ष के बीच चल रही बातचीत से मचाडो की सुरक्षित वापसी का रास्ता बना।
उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला में सभी राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने की आजादी मिले और सरकार-विपक्ष के बीच बातचीत जारी रहे। इससे देश में निष्पक्ष चुनाव कराने का रास्ता खुल सकता है।
ब्राजील में 80 साल के लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। वे पहले दौर की वोटिंग में फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे, लेकिन दूसरे दौर में बाजी पलट दी।

