ईरान के साथ जंग रोकने और पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के अधिकारी सोमवार को तेहरान पहुंचे।
यहां उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और दूसरे अधिकारियों के साथ बैठक की। पजशकियान ने कहा कि मुस्लिम देशों को एकजुट होकर क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए काम करना चाहिए।
यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर जल्द हमला करने की धमकी दी थी।
ईरानी राष्ट्रपति बोले- दबाव से देशों को झुकाया नहीं जा सकता
बैठक के दौरान पजशकियान ने कहा कि क्षेत्र के देशों को अपने लोगों के खिलाफ खतरों का मिलकर सामना करना चाहिए। आपसी मतभेदों को बातचीत से सुलझाना चाहिए और सहयोग बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने कहा की, इन बैठकों में होने वाला कोई भी ऐसा समझौता, जिससे क्षेत्र में एकता, आपसी तालमेल और सहयोग बढ़ेगा, उसे ईरान का पूरा समर्थन मिलेगा।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ?
बैठक में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किये के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन शामिल हुए।
ईरान की ओर से राष्ट्रपति पजशकियान के अलावा विदेश मंत्री अब्बास अराघची और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मेजर जनरल मोहसेन रेजाई भी मौजूद थे।
इससे पहले सऊदी रक्षा मंत्री, तुर्किये के खुफिया प्रमुख और पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने रेजाई के साथ अलग से बैठक की थी।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि चारों देश क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने और बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं।
मक्का रक्षा समझौते का हिस्सा हैं सऊदी-पाक-तुर्किये
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये अगस्त में हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का हिस्सा हैं। इस समझौते के मुताबिक, तीनों देशों में से किसी एक पर हमला बाकी देशों पर हमला माना जाएगा।
सऊदी अरब के सार्वजनिक कूटनीति मामलों के उप मंत्री रायेद क्रिमली ने कहा कि यह बैठक संकट में शामिल पक्षों के बीच तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिशों का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि मक्का रक्षा समझौते में शामिल देश क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। यह पहल कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को भी समर्थन देती है।
अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर अटका समझौता
ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के साथ समझौते की राह में बड़ी रुकावट बना हुआ है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसी महीने की शुरुआत में कहा था कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता में ठोस कमी करनी होगी।
उनके मुताबिक, ऐसा करना अमेरिकी मांगें मानने और दोनों देशों के बीच आठ महीने से चल रही जंग खत्म करने के लिए जरूरी है।
एनरिच्ड यूरेनियम वह होता है, जिसमें एक खास तरह के परमाणु की मात्रा बढ़ाई जाती है। इसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा बनाने के साथ परमाणु हथियारों में भी हो सकता है।
ईरान बोला- एक ग्राम एनरिच्ड यूरेनियम भी देश से बाहर नहीं जाएगा
अमेरिका, इजराइल और कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं। इन देशों की चिंता की एक बड़ी वजह ईरान का यूरेनियम को 60% तक संवर्धित करना है।
आमतौर पर नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए इतने ऊंचे स्तर की जरूरत नहीं होती, जबकि परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम का संवर्धन स्तर करीब 90% होता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प कई बार ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम देश से बाहर ले जाने की मांग कर चुके हैं। लेकिन इसके जवाब में ईरान ने 20 अक्टूबर को कहा था कि वह देश से एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम बाहर नहीं जाने देगा।
ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है। वह अपने यूरेनियम का इस्तेमाल केवल देश की ऊर्जा रूरतों के लिए कर रहा है।
ट्रम्प ने चुनावी रैली के दौरान ईरान पर हमले की धमकी दी थी
ट्रम्प ने 23 अक्टूबर को फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान कहा, 'हम एक और छोटा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी कर सकते हैं।'
अमेरिकी सेना ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ जंग शुरू की थी। इसे 'एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया था। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि दोबारा हमला कब या किस तरह का होगा।
वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने दोबारा हमला किया तो वह खाड़ी देशों में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल को निशाना बनाएगा। इससे इंटरनेट सेवाओं, बैंकिंग और ऑनलाइन कारोबार पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को एक रैली में ईरान पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि ईरान में अब कोई नेता नहीं बचा है और उन्हें यह समझने में परेशानी हो रही है कि बातचीत के लिए किससे बातचीत करें।

