इजराइल के चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट, दोनों बहुमत से दूर रह गए हैं। 91.1% वोटों की गिनती के बाद नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों और आइजनकोट का विपक्षी गठबंधन 48 सीटों पर आगे है।
वहीं, अरब पार्टियों को कुल 19 सीटें मिलती दिख रही हैं। सरकार बनाने के लिए संसद की 120 सीटों में से कम से कम 61 सीटें जरूरी हैं। ऐसे में अरब पार्टियां किंगमेकर बन सकती हैं।
दूसरी ओर, गुरुवार सुबह डबल-एनवेलप बैलेट की गिनती शुरू हो गई है। इन 5 लाख वोटों से संसद की सीटों का अंतिम बंटवारा बदल सकता है।
डबल-एनवेलप बैलेट का इस्तेमाल उन लोगों के वोटों के लिए होता है जिन्होंने अपने तय मतदान केंद्र से अलग जगह पर वोट डाला। इनमें सैनिक, राजनयिक, पुलिसकर्मी और विस्थापित लोग शामिल हैं।
इजराइल के चुनावी नतीजों के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू करने का फैसला मुश्किल हो सकता है।
द यरूशलम पोस्ट के मुताबिक, नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से पीछे रह गया है और याशार नेता गादी आइजनकोट से समझौता किए बिना नई सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं दिख रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के हफ्तों में नेतन्याहू ईरान के साथ संघर्ष फिर शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे थे। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और इजराइली सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर के विरोध के चलते हमला टल गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना प्रमुख का विरोध इजराइल में चुनाव होने तक हमले न करने को लेकर था, जबकि ट्रम्प नहीं चाहते थे कि अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर हमला हो।
इजराइल में गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी खेमा संसद स्पीकर अमीर ओहाना को पद से हटाने की तैयारी कर रहा है।
चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए विपक्षी खेमा अरब पार्टियों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। ओहाना प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के सदस्य हैं।
इस पद के लिए अभी किसी नाम पर सहमति नहीं बनी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यिस्राइल बेतेनु पार्टी के सांसद ओदेद फोरर और आइजनकोट की याशर पार्टी के एलेजर स्टर्न के नामों पर चर्चा हो रही है।
तीसरे नंबर पर जॉइंट लिस्ट, इस गठबंधन को जानिए
इजराइल में 85% वोटों की गिनती के बाद जॉइंट लिस्ट गठबंधन को 12 सीटें मिलती दिख रही हैं। यह इजराइल की अरब आबादी के अधिकारों की बात करने वाला राजनीतिक गठबंधन है। इसमें तीन अलग-अलग पार्टियां शामिल हैं। गठबंधन में अरब नेताओं के साथ यहूदी नेता भी हैं।
हदाश: यह वामपंथी पार्टी है। यह अरब और यहूदी नागरिकों की समानता, मजदूरों के अधिकारों और फिलिस्तीन के साथ शांति की वकालत करती है।
ताल: यह अहमद तिबी की पार्टी है। यह अरब नागरिकों के समान अधिकार, शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन करती है।
बलद: यह अरब राष्ट्रवादी विचारधारा वाली धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। यह इजराइल को ऐसा देश बनाने की वकालत करती है, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलें।
2015: जॉइंट लिस्ट पहली बार इजराइली चुनाव से पहले बनी थी। उस समय अरब समुदाय की चार प्रमुख पार्टियों ने एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया था। गठबंधन ने 13 सीटें जीतीं।
2019: सितंबर में हुए चुनाव में भी इसे 13 सीटें मिलीं।
2020: गठबंधन का प्रदर्शन बेहतर रहा और इसे 15 सीटें मिलीं।
2021: आपसी मतभेदों के कारण राअम गठबंधन से अलग हो गई। इसके बाद हदाश और ताल समेत बाकी पार्टियों ने साथ चुनाव लड़ा।
2022: हदाश और ताल ने साथ चुनाव लड़ा, जबकि बलद अलग हो गई। बलद संसद में पहुंचने के लिए जरूरी 3.25% वोट हासिल नहीं कर पाई।
2026: हदाश, ताल और बलद ने फिर साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया। राअम इस बार भी अलग रही।
इजराइल के कई मीडिया संस्थानों ने दावा किया है कि अरब पार्टी 'राअम' को एक और सीट मिल सकती है। यह सीट जॉइंट लिस्ट से मिलने की बात कही जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 91% वोटों की गिनती के बाद राअम की सीटें 7 से बढ़कर 8 और जॉइंट लिस्ट की सीटें 12 से घटकर 11 हो सकती हैं। हालांकि, दोनों पार्टियों की कुल सीटें 19 ही रहेंगी।
लेकिन द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, सुबह 5:57 बजे तक चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों में कोई बदलाव नहीं हुआ था।
दोनों पार्टियों के बीच अतिरिक्त वोटों के समझौते के तहत 19वीं सीट अब भी जॉइंट लिस्ट के खाते में थी। राअम इस सीट से करीब 1,200 वोट पीछे थी।
इजराइल में रात 10 बजे तक 77.7% वोटिंग हुई। केंद्रीय चुनाव समिति के मुताबिक, 56.95 लाख से ज्यादा लोग वोट डाल चुके थे। 2022 के चुनाव में इसी समय तक 70.6% मतदान हुआ था।
यह आंकड़ा थोड़ा और बढ़ सकता है। रात 10 बजे मतदान केंद्र बंद होने के बाद भी वहां कतार में लगे लोगों को वोट डालने की अनुमति दी गई।
इजराइल के राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई है कि चुनाव में कड़े मुकाबले के बावजूद देश में दोबारा चुनाव कराने की नौबत नहीं आएगी। चुनाव में किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में नेतन्याहू और विपक्षी नेता सरकार बनाने के विकल्प तलाश रहे हैं।
इस स्थिति में अरब पार्टियां अहम भूमिका निभा सकती हैं। उनके समर्थन से ही किसी गठबंधन को बहुमत तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
इजराइल में डबल-एनवेलप बैलेट की प्रक्रिया कैसे काम करती है
मतदाता अपना पसंदीदा पार्टी का पर्चा एक छोटे लिफाफे में डालता है।
इस लिफाफे को दूसरे लिफाफे में रखा जाता है, जिस पर मतदाता की पहचान से जुड़ी जानकारी होती है।
चुनाव अधिकारी जांचते हैं कि मतदाता ने दूसरी जगह वोट तो नहीं डाला।
जांच के बाद बाहरी लिफाफा हटा दिया जाता है और अंदर वाला लिफाफा बिना मतदाता की पहचान के खोला जाता है। इससे वोट की गोपनीयता बनी रहती है।
जिस पार्टी को ज्यादा वोट, उसे ज्यादा सीटें
इजराइल में लोग किसी नेता को नहीं, बल्कि उसकी पार्टी को वोट देते हैं। चुनाव से पहले हर पार्टी अपने उम्मीदवारों की एक सूची बनाती है। पूरे देश में पार्टी को मिले वोटों के आधार पर तय होता है कि उसे संसद में कितनी सीटें मिलेंगी।
लेकिन संसद में सीट पाने के लिए एक शर्त है। किसी पार्टी को कुल वैध वोटों में से कम से कम 3.25% वोट हासिल करने होते हैं। इससे कम वोट मिलने पर पार्टी को संसद में कोई सीट नहीं मिलती।
पार्टी के कौन से उम्मीदवार सांसद बनेंगे, इसका फैसला उम्मीदवारों की लिस्ट से होता है। हर पार्टी चुनाव से पहले अपने उम्मीदवारों की एक लिस्ट जारी करती है। अगर किसी पार्टी को 20 सीटें मिलती हैं, तो लिस्ट में पहले 20 नंबर पर मौजूद उम्मीदवार सांसद बन जाएंगे।
इजराइल में करीब 300 लोगों ने यरुशलम, तेल अवीव और हाइफा में प्रदर्शन कर यहूदी-अरब सरकार बनाने की मांग की। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ, जब चुनाव के शुरुआती नतीजों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलती दिख रही थीं।
विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने सरकार बदलने के लिए प्रयास करने का वादा किया। वहीं, यायर गोलान ने कहा कि वह गठबंधन बनाने के लिए दूसरी पार्टियों के नेताओं से बातचीत करेंगे।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ इडो नॉर्डेन को पद से हटाया जा सकता है। चीफ ऑफ स्टाफ प्रधानमंत्री के कामकाज में मदद करता है और उनकी बैठकों व जरूरी फैसलों के बीच तालमेल संभालता है।
चैनल 13 की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू उनके काम से खुश नहीं हैं और उनके विकल्प की तलाश कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नॉर्डेन को कई अहम बैठकों से भी दूर रखा गया है। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन खबरों को गलत बताया है। नॉर्डेन ने अप्रैल में यह जिम्मेदारी संभाली थी।
इजराइल में अरब पार्टियों के गठबंधन जॉइंट लिस्ट ने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को सत्ता से हटाने के लिए राजनीतिक सहयोग की पेशकश की है। पार्टी ने कहा कि वह वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों के साथ काम करने को तैयार है।
जॉइंट लिस्ट के शुरुआती नतीजों में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। पार्टी ने बयान में कहा कि उसके समर्थकों ने चुनाव में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। उसने नेतन्याहू की सरकार की नीतियों को नस्लवादी बताते हुए कहा कि वह इन्हें बदलने और नई सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी।
इजराइल के चुनाव में अरब पार्टियों को संसद की 19 सीटें मिलने का अनुमान है। ऐसे में विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने के लिए इन पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
एक्सपर्ट लोवेनस्टीन ने अल जजीरा से बताया कि इजराइल के अरब नागरिकों ने बड़ी संख्या में मतदान किया। इजराइल में रहने वाले उनके फिलिस्तीनी लोगों को चुनाव में कोई भी विकल्प बहुत अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन वे नेतन्याहू की सरकार के चार और साल नहीं चाहते थे।
अब अरब पार्टियां आइजनकोट के साथ मिलकर सरकार बना सकती हैं, लेकिन यह देखना होगा कि आइजेनकोट और उनके सहयोगी अरब पार्टियों को साथ लेने के लिए तैयार होते हैं या नहीं। आइजेनकोट अब तक अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से इनकार करते रहे हैं।
लोवेनस्टीन ने कहा कि ऐसा गठबंधन बनना संभव है, लेकिन उसके लंबे समय तक टिके रहने की संभावना देखना मुश्किल है।
इजराइल में अरब पार्टियों के गठबंधन जॉइंट लिस्ट ने चुनाव में धांधली के आरोपों को खारिज किया है। गठबंधन के नेता अहमद तिबी ने लिकुड पार्टी के आरोपों को हारने वालों की बयानबाजी बताया।
अल जजीरा से बातचीत में तिबी ने कहा कि चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि इजराइल में कुछ लोग अरब पार्टियों को मिले वोटों की वैधता पर सवाल उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
शुरुआती नतीजों के मुताबिक, जॉइंट लिस्ट को इजराइली संसद (नेसेट) में 12 सीटें मिलने की संभावना है। तिबी ने इसे बड़ी जीत बताया।
इजराइल में सरकार बनाने के लिए 42 दिन मिलेंगे
इजराइल में सरकार बनाने के लिए चुने गए नेता को शुरुआत में 28 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति इसे 14 दिन और बढ़ा सकते हैं। यानी सरकार बनाने के लिए कुल 42 दिन मिल सकते हैं।
इस दौरान नेता को दूसरी पार्टियों से बातचीत कर समर्थन जुटाना होता है। इसके लिए पार्टियों के बीच नीतियों और मंत्रिपदों को लेकर समझौते हो सकते हैं।
सरकार बनाने के लिए आम तौर पर संसद में 61 सीटों का समर्थन जरूरी होता है। अगर नेता 61 सीटों का समर्थन नहीं जुटा पाता, तो वह छोटी पार्टियों के सहयोग से अल्पमत सरकार बनाने या दो नेताओं के बीच बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनने का समझौता करने की कोशिश भी कर सकता है।
इस बार राष्ट्रपति के सामने क्या चुनौती है?
बुधवार को आए शुरुआती एग्जिट पोल में नेतन्याहू गठबंधन और विपक्षी गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला दिखा। हालांकि, शुरुआती नतीजों में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को सबसे ज्यादा वोट मिलते दिख रहे हैं। ऐसे में नेतन्याहू दावा कर सकते हैं कि सरकार बनाने का पहला मौका उन्हें मिलना चाहिए।
हालांकि चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करना ही प्रधानमंत्री बनने के लिए काफी नहीं है। राष्ट्रपति को यह देखना होगा कि कौन-सा नेता अलग-अलग पार्टियों का समर्थन जुटाकर संसद में बहुमत साबित कर सकता है।
नेतन्याहू की पार्टी ने अरब दलों पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया
नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने अरब पार्टियों पर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसी शिन बेट से जांच की मांग की है।
लिकुड ने आरोप लगाया कि चुनाव में वोटरों को धमकाया गया, हिंसा हुई और फर्जी तरीके से वोट डाले गए। पार्टी ने कहा कि उसने जांच एजेंसियों को सबूत भी सौंपे हैं।
हालांकि, केंद्रीय चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने धांधली के आरोपों को खारिज किया है।
EU ने इजराइल के चुनाव की तारीफ की
यूरोपीय संघ (EU) ने इजराइल में हुए चुनाव के बाद वहां के लोगों को बधाई दी है। EU ने करीब 78% मतदान की तारीफ करते हुए इसे इजराइल के मजबूत लोकतंत्र की निशानी बताया। EU ने कहा कि वह इजराइल में नई सरकार बनने के बाद उसके साथ बेहतर रिश्ते बनाना चाहता है।
EU के प्रवक्ता ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद दोनों पक्ष मिलकर काम करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि EU और इजराइल के बीच लंबे समय से रिश्ते हैं और दोनों लोकतंत्र में भरोसा करते हैं।
राष्ट्रपति बोले- नई सरकार के लिए सभी दल बातचीत करें
इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने सभी राजनीतिक दलों से नई सरकार बनाने के लिए बातचीत करने और दोबारा चुनाव से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी दलों को खुले मन से चर्चा करनी चाहिए। चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है।
हर्जोग ने कहा कि अगले हफ्ते चुनाव के आधिकारिक नतीजे मिलने के बाद वे संसद में सभी दलों से बातचीत शुरू करेंगे। उन्होंने चुनाव में रिकॉर्ड मतदान की भी तारीफ की।
जिन इलाकों में जंग का असर, वहां भी नेतन्याहू आगे
इजराइल में चुनाव के शुरुआती नतीजों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड उन शहरों में भी आगे है, जहां जंग के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। इनमें लेबनान की सीमा के पास बसा किरयात शमोना और दक्षिणी इजराइल के स्देरोत और ओफाकिम शहर शामिल हैं।
किरयात शमोना में दोपहर 12:30 बजे तक करीब 48% वोट नेतन्याहू की पार्टी को मिले। वहीं, स्देरोत में करीब 39% लोगों ने उनकी पार्टी को वोट दिया।
जंग के दौरान इन शहरों पर रॉकेट और ड्रोन से हमले हुए थे। कई लोगों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगह रहना पड़ा था।
चुनाव में दो प्रमुख अरब पार्टियों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। इन पार्टियों के समर्थक बड़ी संख्या में वोट डालने पहुंचे। उन्होंने जॉइंट लिस्ट को संसद में अब तक की सबसे ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। ऐसे में अगली सरकार बनाने में इनकी भूमिका अहम हो सकती है।
राअम के नेता मंसूर अब्बास ने एक टीवी चैनल से कहा कि मतदान में बड़ी संख्या में अरब नागरिकों की भागीदारी दिखाती है कि उन्होंने अपनी निराशा और हताशा को उम्मीद में बदल दिया है। इजराइल की कुल आबादी में अरब नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 20% है।
1. 7 अक्टूबर के हमास हमले की जांच: 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल पर हमला किया था। इस हमले को रोकने में इजराइली सेना और खुफिया एजेंसियां नाकाम रही थीं।
तीन साल बाद भी सरकार ने इस बात की जांच के लिए आयोग नहीं बनाया है कि इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस हमले को रोकने में नाकाम रही और उसे इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
2. सेना में भर्ती को लेकर विवाद: इजराइल में ज्यादातर यहूदियों के लिए सेना में सेवा देना जरूरी है। 1948 में इजराइल बनने के बाद, हरेदी समुदाय के 400 लोगों को यहूदी संस्थानों में पढ़ने के लिए सेना में भर्ती होने से छूट मिली थी।
इसका मकसद धार्मिक विद्वानों की पढ़ाई और परंपरा को बचाए रखना था। लेकिन धीरे-धीरे छूट का दायरा बढ़ता गया। इसी छूट को लेकर आज इजराइल में विवाद है।
दूसरे समुदाय के लोगों का कहना है कि जब देश युद्ध में है, तब सभी को सेना में सेवा देनी चाहिए। नेतन्याहू को हरेदी समुदाय के लोगों का वोट मिलता है। ऐसे में वे इस छूट को बरकार रखना चाहते हैं।
वहीं गादी आइजनकोट का रुख नेतन्याहू से अलग है। वे चाहते हैं कि हरेदी समुदाय के लोगों को भी सेना या नागरिक सेवा में शामिल होना चाहिए।

