BRICS सम्मेलन से भारत को क्या हासिल हुआ? पूर्व विदेश सचिव शशांक ने एक-एक सवाल का दिया जवाब
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21 Sep 2026, 12:09 PM
BRICS के बढ़ते प्रभाव, भारत-चीन संबंधों, ऊर्जा सुरक्षा और UNSC में सुधार जैसे मुद्दों पर दुनिया की नजर है। ऐसे में भारत के लिए इस मंच की बदलती भूमिका कितनी अहम है, इस पर अजय प्रताप तिवारी ने भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक से बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...BRICS सम्मेलन से भारत को क्या हासिल हुआ ?
BRICS मूल रूप से आर्थिक सहयोग का मंच है। ऐसा पहली बार हुआ कि इसमें कई अन्य अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक पहलू भी शामिल हो गए। जहां तक कूटनीति की बात है, तो यह बड़ी सफलता मानी जाएगी क्योंकि वैश्विक स्तर पर आपसी मतभेद बढ़ने के बावजूद सम्मेलन का स्तर बढ़ा है। दुनिया में जितने भी बड़े आर्थिक संगठन हैं, चाहे वे संयुक्त राष्ट्र के तहत काम करते हों या अलग स्तर पर, उनका मूल उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाना रहा है।विश्व बैंक, IMF, G-7 या G-20 जैसे संगठनों का भी मुख्य फोकस यही रहा है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक सहयोग बना रहे और अर्थव्यवस्था से जुड़े काम सुचारू रूप से चलते रहें। पहली बार ऐसा हुआ है कि आर्थिक मुद्दों के साथ राजनीतिक स्तर पर भी बातचीत और चर्चा बढ़ी है। पश्चिमी व्यवस्था से अलग अपनी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी इसे एक नया आयाम मिला है। ऐसे में इसका महत्व पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है।BRICS की मजबूती के लिए भारत-चीन संबंधों में संतुलन की दरकार है। क्या सीमा होनी चाहिए?
दो देशों के रिश्ते बेहतर होते हैं तो भारत की ऊर्जा जरूरते रूस, आपसी सहयोग का दायरा भी बढ़ता है। भारत और चीन के बीच भी आर्थिक और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश होनी चाहिए। हालांकि, इसके साथ संतुलन भी जरूरी है। दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन है तो इसे कम करने के उपाय तलाशने होंगे। इसके लिए निवेश का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। चीन की ओर से भारत में थर्ड कंट्री इन्वेस्टमेंट बढ़ाया जा सकता है। व्यापार में संतुलन के साथ सहयोग का दायरा बढ़ाना जरूरी है। भारत और चीन दोनों बड़े देश हैं। रिश्ते सुधरने से दोनों के साथ दूसरे देशों को भी फायदा होगा।