भारत पर मंडरा रहा गंभीर खतरा! 180 से ज्यादा वैज्ञानिकों की चेतावनी- कुछ तो बड़ा होने वाला है

भारत पर मंडरा रहा गंभीर खतरा! 180 से ज्यादा वैज्ञानिकों की चेतावनी- कुछ तो बड़ा होने वाला है
सुभद्रा श्रीवास्तव, नई दिल्ली: देश के 180 से अधिक वैज्ञानिकों और इको लॉजिकल एक्सपर्ट ने सुपर अल नीनो को लेकर अलर्ट जारी किया है। उन्होंने रिसर्चर्स और इस क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों से बातचीत के बाद आगामी 'सुपर' अल नीनो घटना के लिए चिंता जताई है। साथ ही इसके लिए तैयार रहने की अपील पर हस्ताक्षर भी किए हैं। इस घटना का देश की प्राकृतिक प्रणालियों पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। अल नीनो की पहचान उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से होती है।

सुपर अल नीनो को लेकर बड़ी टेंशन

वैज्ञानिकों ने सूखे, भीषण गर्मी, जंगल की आग और इकोसिस्टम को नुकसान जैसे खतरों की ओर इशारा किया है। यह अपील तब आई है जब दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की सालाना वापसी शुरू हो रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले कहा था कि मानसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से हट चुका है और अगले तीन-चार दिनों में राजस्थान, पंजाब, सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ और हिस्सों से इसके हटने के लिए हालात अनुकूल हैं।

मौसम विभाग के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

IMD के डेटा के मुताबिक, 4 जून से 19 सितंबर के बीच भारत में बारिश में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। दक्षिणी प्रायद्वीप में सबसे ज्यादा, यानी 29 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। जून में 35 फीसदी की कमी देखी गई, जबकि जुलाई एकमात्र ऐसा महीना था जब औसत से ज्यादा बारिश हुई। अगस्त में बारिश 213.3 मिमी रही, जो 2001 के बाद से उस महीने के लिए सातवीं सबसे कम बारिश थी।

वैज्ञानिकों ने दी सुपर अल नीनो की चेतावनी

वैज्ञानिकों ने कहा कि ट्रॉपिकल पैसिफिक में अल नीनो के चेतावनी वाले संकेत पहले ही दिख रहे हैं। समुद्र की सतह का तापमान 0.5°C की सीमा से ऊपर बढ़ गया है और अगस्त में 2.6°C तक पहुंच गया है। वैज्ञानिकों की अपील में बताए गए अनुमानों से पता चलता है कि तापमान में अंतर 4°C से ऊपर जा सकता है। इस महीने की शुरुआत में, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कहा था कि मौजूदा अल नीनो की स्थिति आने वाले महीनों में बहुत जोरदार घटना में बदल सकती है और फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है।

क्या अल नीनो भारत के लिए मुसीबत लाएगा?

वैज्ञानिकों ने रिसर्च करने वालों से अपील की कि वे इस शुरुआती चेतावनी का इस्तेमाल मॉनिटरिंग बढ़ाने और भारत के इकोसिस्टम में हो रहे बदलावों को रिकॉर्ड करने के लिए करें। उन्होंने कहा कि हम अपने साथी इकोलॉजिस्ट से अपील करते हैं कि वे प्राकृतिक दुनिया और उससे जुड़े सामाजिक सिस्टम पर भीषण मौसम की घटनाओं के असर को बेहतर ढंग से समझने के लिए अपनी रिसर्च और मॉनिटरिंग की कोशिशों को मजबूत और व्यापक बनाएं।

एक्सपर्ट ने चेतावनी दी कि एक जोरदार अल नीनो सूखा और भीषण गर्मी ला सकता है, जिससे किसानों, मछुआरों और चरवाहों पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कोरल ब्लीचिंग और उनके मरने, जंगल की आग बढ़ने और वर्षावनों के बड़े पेड़ों के नुकसान की ओर भी इशारा किया। इस अपील में कम दिखाई देने वाले इकोलॉजिकल बदलावों पर भी जोर दिया गया, जिसमें जानवरों के व्यवहार में बदलाव और फलों के उत्पादन में देरी शामिल है।

मानसून के लिए हिंद महासागर क्यों जरूरी है?

साइन करने वालों ने कहा कि इसके अलावा, भारत की प्रकृति पर कुछ असर भी पड़ सकते हैं – जैसे फलों के आने में देरी या जानवरों के व्यवहार में बदलाव। ये असर भी उतने ही महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन अगर आप खास तौर पर उन पर ध्यान न दें, तो शायद वे आसानी से दिखाई न दें।


इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी के क्लाइमेट साइंटिस्ट रॉक्सी मैथ्यू कोल ने PTI को बताया कि आने वाले समय का इस्तेमाल संवेदनशील इकोसिस्टम पर नजर रखने और उनकी सुरक्षा करने के लिए किया जाना चाहिए। कोल ने कहा कि हमें इन बदलावों को होते हुए रिकॉर्ड करना चाहिए, साथ ही बचे हुए इकोसिस्टम को बचाना चाहिए और उन दबावों को कम करना चाहिए जो उन्हें पहले से ही कमजोर कर रहे हैं। इस अल नीनो के दौरान हम जो सीखते हैं और जिनकी सुरक्षा करते हैं, उससे भारत को भविष्य में ज्यादा गर्मी और अस्थिर मौसम के लिए तैयार होने में मदद मिल सकती है।
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