ब्रिटेन के चर्चित रणनीतिकार एलेस्टर कैंपबेल ने एक इंटरव्यू में कहा, 'पाकिस्तान मक्का समझौते के बाद जो चाहता था, उसे भारत सरकार ने नहीं दिया। मक्का रक्षा समझौते के बाद भारत की प्रतिक्रिया बहुत ही नपी तुली और संयमित थी। इसने हालात को नहीं भड़काया।' उधर, ब्रिटेन के पूर्व मंत्री रोरी स्टीवर्ट ने कहा, 'सऊदी अरब नहीं चाहेगा कि उसे भारत के साथ युद्ध में घसीटा जाए। भारत का प्वाइंट बहुत रोचक है। इजरायल भी एक गठबंधनों का नेटवर्क बनाना चाहता है जिसमें भारत, ग्रीस, साइप्रस और संभवत: यूएई भी शामिल हैं।'
भारत ने मक्का रक्षा समझौते पर क्या कहा?
ब्रिटेन के इन दोनों एक्सपर्ट का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत ने समझौते पर बहुत ही संयमित प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत मक्का समझौते के राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर की समीक्षा कर रहा है और अपने हितों की रक्षा करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा था, ‘जहां तक इस समझौते का सवाल है, हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिहाज से इसके प्रभावों का आकलन कर रहे हैं।’भारतीय प्रवक्ता ने कहा, ‘भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस संबंध में सभी जरूरी कदम उठाएगा।’ कई अन्य एक्सपर्ट का कहना है कि पाकिस्तान भारत को इस समझौते के जरिए नीचा दिखाना चाहता था और चाहता था कि वह बहुत तीखी प्रतिक्रिया दे लेकिन भारत के सऊदी के साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं। अरबों डॉलर का हर साल व्यापार होता है। भारत के एनएसए अजीत डोवाल हाल ही में सऊदी अरब गए भी थे। ऐसे में भारत ने बहुत नपी तुली प्रतिक्रिया ही दी है।सऊदी और तुर्की के साथ रक्षा समझौता रक्षात्मक: पाकिस्तान
इस बीच पाकिस्तान ने सफाई दी है कि उसने सऊदी अरब और तुर्किये के साथ जिस त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, वह 'पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है।' पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, ‘यह समझौता पाकिस्तान की जनता की इच्छाओं के अनुरूप है।’ उन्होंने कहा कि यह समझौता ‘पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है, जो सदस्य देशों के लिए खतरों और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की अनुमति देता है।’
