व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि NSR पर रूस को भारत और चीन जैसे सहयोगी देशों की दिलचस्पी दिख रही है, ये एक अच्छा संकेत है। उन्होंने आगे कहा कि रूस ने बार-बार ये दोहराया है कि वह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के दायरे में रहकर नॉर्दर्न सी रूट के फायदों का इस्तेमाल करने और सहयोग करने के लिए तैयार है। हम इस पर सहयोगी देशों के साथ सक्रिय रूप से चर्चा कर रहे हैं।
नॉर्दर्न सी रूट क्या है?
नॉर्दर्न सी रूट रूस के आर्कटिक तट के साथ-साथ चलता है और आर्कटिक महासागर के जरिए अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ता है। यह पारंपरिक स्वेज नहर रूट की तुलना में यूरोप और एशिया के बीच काफी छोटा समुद्री लिंक मुहैया कराता है। इससे यात्रा के समय में 10 से 14 दिनों की कमी आ सकती है।इस रूट का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि आर्कटिक में बर्फ की परत लगातार कम हो रही है। इससे यहां से लंबे समय तक नेविगेशन संभव हो सकता है। हालांकि खराब मौसम की स्थिति, सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर और आइस-क्लास जहाजों की उपलब्धता इसके व्यापक कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
रूस को सहयोगियों की तलाश
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के एक विश्लेषण में कहा गया है कि रूस इस रूट को विकसित करने के लिए सहयोगियों की तलाश कर रहा है। रूस के आर्कटिक तट पर पर्याप्त बंदरगाह और कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, जो इस क्षेत्र को देश के औद्योगिक और कमर्शियल केंद्रों से जोड़ सके। रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदार होने के नाते भारत और चीन NSR के विकास और संचालन में भाग लेने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।इस रूट का मॉस्को और नई दिल्ली दोनों के लिए व्यापक जियोपॉलिटिकल महत्व है। रूसी पक्ष भारत को शामिल करने में महत्व देखता है क्योंकि वह रूसी सुदूर पूर्व में चीन की बढ़ती आर्थिक मौजूदगी को संतुलित करना चाहता है। पुतिन ने आर्कटिक में व्यापक जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम और NATO के विस्तार पर भी हालिया दिनों में चिंता का इजहार किया है।
