द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते दिल्ली में हुई नेपाल-भारत इंटर-गवर्नमेंटल सब-कमेटी ऑन ट्रेड, ट्रांजिट एंड कोऑपरेशन टू कॉम्बैट अनऑथराइज्ड ट्रेड (व्यापार और अनधिकृत व्यापार सहयोग पर नेपाल-भारत अंतर सरकारी उपसमिति) की बैठक में नेपाल ने भारत से जूट और स्टील उत्पादों के निर्यात में आ रही बाधाओं को दूर करने का विशेष अनुरोध किया है।
भारत ने लगाई सेफगार्ड ड्यूटी
नेपाली निर्यातकों का कहना है कि जूट और स्टील के आयात पर भारतीय प्रतिबंधों ने उनके कारोबार को प्रभावित किया है। वहीं भारतीय निर्माताओं का तर्क है कि आयात से घरेलू उत्पादन को नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण दिल्ली को सुरक्षा उपाय लागू करने पड़े। पिछले साल दिसंबर में भारत ने सस्ते आयात पर रोक लगाने के लिए चुनिंदा स्टील उत्पादों पर तीन साल तक सेफगार्ड ड्यूटी लगाई है।भारत का यह शुल्क पहले साल में 12 प्रतिशत, दूसरे साल में 11.5 प्रतिशत और तीसरे साल में 11 प्रतिशत है। यह उपाय चीन, वियतनाम और नेपाल से होने वाले आयात पर लागू होता है। स्टेनलेस स्टील सहित विशेष स्टील उत्पादों को इससे छूट दी गई है। दुनिया में कच्चे स्टील का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश भारत है। इसने तीन साल के लिए सेफगार्ड ड्यूटी (सुरक्षा शुल्क) को मंजूरी दी है।
हमारा BIS सर्टिफिकेट जून में एक्सपायर हो गया था और हमने इसे पाने के लिए तुरंत अप्लाई किया था लेकिन हमारी एप्लीकेशन को होल्ड पर डाल दिया गया है। इससे व्यापार पर असर हो रहा है।
नेपाली कारोबारी क्या कह रहे हैं
नेपाली उत्पादकों का तर्क है कि नेपाल पर सेफगार्ड ड्यूटी लगाना सही नहीं है क्योंकि यह आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से कमजोर स्थिति वाला 'सबसे कम विकसित देश' है। उनका कहना है कि इस टैरिफ की वजह से उत्पादन और निर्यात पर काफी बुरा असर पड़ा है। नेपाल के स्टील निर्यात में पारंपरिक रूप से जिंक शीट का दबदबा रहा है और भारत इसके निर्यात का मुख्य बाजार है।नेपाली एक्सपोर्टर्स के अनुसार, भारत ने पिछले दो महीनों से इंडियन ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड सर्टिफिकेट रिन्यूअल रोक रखा है। नेपाल की सबसे बड़ी स्टील मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में से एक हुलास स्टील इंडस्ट्रीज के सुनील मनोत का कहना है कि एक्सपोर्ट रुकने की वजह से प्रोडक्शन कैपेसिटी घटकर 20 प्रतिशत रह गई है। इससे इन्वेस्टमेंट पर असर पड़ा है और प्रोडक्शन लागत बढ़ रही है।
