UNGA के मंच पर कश्मीर और मक्का पैक्ट का जिक्र, तुर्की के खलीफा एर्दोगन बोल रहे पाकिस्तानी भाषा, भारत के लिए खतरा?

UNGA के मंच पर कश्मीर और मक्का पैक्ट का जिक्र, तुर्की के खलीफा एर्दोगन बोल रहे पाकिस्तानी भाषा, भारत के लिए खतरा?
न्यूयॉर्क: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक को संबोधित करते हुए कश्मीर का राग अलापा। उन्होंने कश्मीर पर बातचीत करने और विवाद का हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के जरिए करने की बात कही। हालांकि, UNGA के मंच से एर्दोगन पहले भी कश्मीर का जिक्र कर चुके हैं, लेकिन इस बार की टाइमिंग अहम है। पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता साइन करने के बाद यह पहली बार है, जब एर्दोगन ने दुनिया के सबसे बड़े मंच पर कश्मीर का जिक्र किया है।

तुर्की ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ 7 अगस्त को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसे इस्लामिक दुनिया का NATO कहा जा रहा है, क्योंकि इसके नियम के अनुसार किसी एक देश पर बाहरी आक्रमण तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस नए गुट के बनने और कश्मीर पर इसके रुख को देखते हुए भारत करीबी से नजर रख रहा है।

कश्मीर के साथ मक्का पैक्ट का भी जिक्र

UNGA के मंच से दुनिया के नेताओं को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने कश्मीर विवाद को स्थायी समाधान के लिए बहुपक्षीय ढांचे के तहत कोशिश करने की बात की। तो उसी भाषण में उन्होंने 7 अगस्त को हुए मक्का पैक्ट का भी जिक्र किया। एर्दोगन ने इस गठबंधन को क्षेत्रीय स्वामित्व को बढ़ावा देने और इस्लामिक देशों के बीच सामूहिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पल बताया। उन्होंने कहा कि तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह समझौता सुरक्षा चुनौतियों का स्थानीय समाधान खोजने के साथ इस्लामी दुनिया में एकजुटता का मजबूत संदेश भी देता है।

भारत के लिए क्यों हैं टेंशन वाली बात?

UNGA में एर्दोगन के संबोधन ने तुर्की और पाकिस्तान के बीच उभरते रणनीतिक रिश्तों पर सबका ध्यान खींचा है। पाकिस्तान मक्का समझौते के जरिए जम्मू-कश्मीर पर ज्यादा अंतरराष्ट्रीय समर्थन पाने की कोशिश कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का जिक्र करके एर्दोगन ने पाकिस्तान की ही भाषा बोली है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मक्का समझौते के तहत बना गठबंधन आगे चलकर भारत के हितों के खिलाफ राजनीतिक चालें चलने के लिए मोहरा बनेगा।

कश्मीर पर भारत का रुख एकदम साफ

भारत ने कश्मीर पर उठने वाली हर आवाज को हमेशा खारिज करते हुए करारा जवाब दिया है। भारत ने लगातार कहा है कि PoK समेत जम्मू-कश्मीर का पूरा इलाका देश का अभिन्न और अविभाज्य अंग है। नई दिल्ली का कहना रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों पर 1972 के शिमला समझौते के तहत शांतिपूर्ण और सीधी बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। इसमें तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।
Advertisement