एक ई सिगरेट की शुरुआती कीमत 2000 से लेकर 15000 तक होती है, जिसमें कम से कम 600 और ज्यादा से ज्यादा 20 हजार तक कश (पफ) होते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार 100 मिलियन लोग पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल करते हैं। इनमें से 86 मिलियन लोग एडल्ट हैं, बाकी 14 मिलियन नाबालिग हैं। इसे भारत में 18 सितंबर 2019 में ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) द्वारा प्रतिबंधित किया गया था। ऐसा इसलिए कि इसमें काफी निकोटिन होती है जो ब्रेन और लंग्स को नुकसान पहुंचाता है। यह बच्चों और यंगस्टरों में एडिक्शन का कारण बनता है। पुलिस से बचने के लिए अब इसकी बिक्री ऑनलाइन भी की जा रही है।
थाईलैंड, कंबोडिया और चीन की ई-सिगरेट की गिरफ्त में आ रहे भारत के युवा, ब्रेन, लंग्स पर होता है असर
नवीन निश्चल, नई दिल्ली: 'नशे के खिलाफ अभियान, देश को सलाम' अभियान के तहत जब गांजा, स्मैक, हेरोइन जैसे ड्रग्स पर दिल्ली पुलिस का एक्शन शुरू हुआ तो नशा बेचने वालों और नशे का सेवन करने वालों ने दूसरा रास्ता भी अख्तियार किया है। इसका एक विकल्प मार्केट में है प्रतिबंधित ई सिगरेट, जिसका प्रचलन चोरी छुपे युवाओं में काफी बढ़ गया है। दिल्ली पुलिस को इसकी भनक लगी तो पता लगाना शुरू किया। जांच पता चला कि ये ई सिगरेट थाईलैंड, कंबोडिया और चीन से भारत में मंगवाए जा रहे हैं। इसे देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह प्रतिबंधित ई सिगरेट ही है जिसमें निकोटिन की ज्यादा मात्रा डाली जा रही है।
एक ई सिगरेट की शुरुआती कीमत 2000 से लेकर 15000 तक होती है, जिसमें कम से कम 600 और ज्यादा से ज्यादा 20 हजार तक कश (पफ) होते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार 100 मिलियन लोग पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल करते हैं। इनमें से 86 मिलियन लोग एडल्ट हैं, बाकी 14 मिलियन नाबालिग हैं। इसे भारत में 18 सितंबर 2019 में ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) द्वारा प्रतिबंधित किया गया था। ऐसा इसलिए कि इसमें काफी निकोटिन होती है जो ब्रेन और लंग्स को नुकसान पहुंचाता है। यह बच्चों और यंगस्टरों में एडिक्शन का कारण बनता है। पुलिस से बचने के लिए अब इसकी बिक्री ऑनलाइन भी की जा रही है।
एक ई सिगरेट की शुरुआती कीमत 2000 से लेकर 15000 तक होती है, जिसमें कम से कम 600 और ज्यादा से ज्यादा 20 हजार तक कश (पफ) होते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार 100 मिलियन लोग पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल करते हैं। इनमें से 86 मिलियन लोग एडल्ट हैं, बाकी 14 मिलियन नाबालिग हैं। इसे भारत में 18 सितंबर 2019 में ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) द्वारा प्रतिबंधित किया गया था। ऐसा इसलिए कि इसमें काफी निकोटिन होती है जो ब्रेन और लंग्स को नुकसान पहुंचाता है। यह बच्चों और यंगस्टरों में एडिक्शन का कारण बनता है। पुलिस से बचने के लिए अब इसकी बिक्री ऑनलाइन भी की जा रही है।
