जयशंकर और कॉम्बो की मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय संबंधों और भारत-यूरोपीय संघ के रिश्तों की समीक्षा की। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने 'समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन' (UNCLOS) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। UNCLOS को समुद्र का संविधान कहा जाता है।
दोनों देशों ने कब्जे का किया विरोध
जयशंकर ने X पर एक पोस्ट में मुलाकात के बारे में जानकारी देते हुए लिखा, "साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कॉम्बो से मिलकर खुशी हुई। हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग और भारत-यूरोपीय संघ के संबंधों में लगातार प्रगति की समीक्षा की। क्षेत्रीय चुनौतियों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। अपने इलाकों पर अवैध कब्जों के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दोहराया। साथ ही समुद्र के संविधान के तौर पर UNCLOS के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जताई।"एर्दोगन ने उठाया था कश्मीर का मुद्दा
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान कश्मीर विवाद का मुद्दा उठाया था। मंगलवार को महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का प्रोपेगैंडा आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में यह जरूरी है कि कश्मीर मुद्दे समेत सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के तहत सुलझाया जाए।साइप्रस के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
साइप्रस के विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। कॉम्बो ने X पर लिखा, अपने प्यारे दोस्त और सहयोगी डॉ. एस जयशंकर से मिलकर हमेशा बहुत खुशी होती है। हमने बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और इसे आगे बढ़ाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। साथ ही व्यापार, शिपिंग, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, रक्षा, डिजिटलीकरण और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।भारत और साइप्रस ने अपने व्यापार और रक्षा संबंधों को मजबूत किया है। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने मई में भारत का दौरा किया था। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। दोनों देशों ने व्यापार और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के लिए कई समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। साइप्रस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया है।
