'भारत ने खुद पर राज करने वाले ब्रिटेन को ही पछाड़ दिया', सिंगापुर के पूर्व डिप्लोमेट हुए फैन, बोले- कमाल की तरक्की
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30 Jul 2026, 02:16 PM
सिंगापुर: सिंगापुर के पूर्व राजनयिक किशोर महबूबानी ने कहा है कि भारत ने हालिया दशकों में, अपनी आजादी के बाद से काफी तरक्की की है। उन्होंने कहा कि चीन की चर्चा तो दुनिया में हो रही है लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद किस तरह भारत ने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने ये भी कहा कि हजारों साल तक चीन और भारत दो ऐसे देश थे, जो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थे। ऐसे में भारत और चीन की तरक्की पर यूरोप को हैरत नहीं होनी चाहिए।किशोर महबूबानी से एक कार्यक्रम में सवाल किया गया था कि क्या भारत के आगे बढ़ने के बारे में हम क्या गलत समझते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि यह बात एक हद तक ठीक लगती है। सिंगापुर के पूर्व राजनयिक ने कहा, 'लोग चीन को देखते हैं और भारत को भूल जाते हैं। हालांकि भारत की कहानी असली कमाल की है। 100 साल पहले भारत पर अंग्रेजों का राज था और आज भारतीय अर्थव्यवस्था ब्रिटेन से बड़ी है। 2050 तक यह यूके की अर्थव्यवस्था से 4 गुना बड़ी हो जाएगी।'चीन-भारत का रहा है दबदबा
महबूबानी ने आगे कहा कि कुछ लोगों को हैरानी होती है कि भारत और चीन अच्छा कर रहे हैं। वह इसे ऐसे देखते हैं, जैसे कुछ अजीब हो गया है। उनको समझना चाहिए कि पिछले 2000 सालों में से 1800 सालों तक दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हमेशा भारत और चीन ही रही हैं। इसलिए उनका वापस आगे आना कोई हैरानी की बात नहीं है।किशोर महबूबानी ने खासतौर से भारत को लेकर बात की और कहा कि दुनिया में बनी गरीबी की छवि को भारत तोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि साल 2000 में ब्रिटिश अर्थव्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था से 3.5 गुना बड़ी थी। आज भारत की अर्थव्यवस्था यूके से बड़ी है और अगले सालों में और ज्यादा बढ़ जाएगी। ये भारतीय इकॉनमी की तरक्की को दिखाता है।क्यों की महबूबानी ने टिप्पणी
पश्चिम के देशों, खासतौर से अमेरिका में चीन की हालिया वर्षों में बढ़ी ताकत पर काफी चिंता देखी गई है। अमेरिकियों ने कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों से ये कहा है कि चीन की बढ़ती ताकत उनको फिक्र में डालती है। इसी साल मई मे दिल्ली में रायसीना डायलॉग में अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ ने कहा था कि अमेरिका भारत के साथ वह 'गलतियां' नहीं दोहराएगा, जो दो दशक पहले चीन के साथ की थीं, ताकि भविष्य में भारत को अमेरिका का प्रतिस्पर्धी बनने से रोका जा सके। अमेरिकियों के भारत-चीन पर इस तरह के बयान दुनिया का ध्यान खींचते हैं।