नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से बात करते हुए जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि 'पाकिस्तान इस खेल में माहिर है और डोनाल्ड ट्रंप का अभी उसे साथ मिला हुआ है। इसलिए बहुत कम उम्मीद है कि उसे ग्रे लिस्ट में डाला जाएगा।' एसपी वैद वो पुलिस अधिकारी रहे हैं जिन्होंने कई बार मसूद अजहर से पूछताछ की जब वो भारतीय जेल में बंद था। जब मसूद अजहर को कांधार विमान अपहरण के बाद छोड़ा गया था उस वक्त एसपी वैद ही उसे लेकर जेल से गये थे।
कैसे FATF की पाबंदियों से बचने के लिए पैंतरे बदल रहा पाकिस्तान
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को लेकर पाकिस्तान हर बार ऐसी ही पैंतरेबाजी करता है। पेरिस में 26 अक्टूबर को होने वाली बैठक से ठीक एक महीने पहले इस्लामाबाद ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर पर इनाम की राशि बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी और फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की 'रेड बुक' में उसका नाम फिर से 'भगोड़े' के तौर पर दर्ज किया।भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तान के इस कदम को दिखावा करार दिया है। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से बात करते हुए एसपी वैद ने इसे ध्यान भटकाने की चाल बताया। उनका कहना बिल्कुल सही भी है क्योंकि इस कदम के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत संपत्ति जब्त करने की कोई पुष्टि नहीं हुई, प्रत्यर्पण में कोई सहयोग नहीं मिला और न ही जैश-ए-मोहम्मद के संगठनात्मक ढांचे को खत्म करने की कोई कार्रवाई हुई। पाकिस्तान ने जो पेश किया है वह बस उसके तमाशे को दिखाता है।
क्या अंधी हो चुकी है आतंकवाद पर नजर रखने वाली संस्था?
सीनियर आईपीएस अधिकारी ब्रिजेश सिंह ने द संडे गार्डियन में लिखा है कि पाकिस्तान की यह कोई नई चाल नहीं है। पाकिस्तान को 2018 में 27-पॉइंट वाले एक्शन प्लान के तहत FATF की ग्रे लिस्ट में धकेला गया था और अक्टूबर 2022 में प्रोबेशन पर उससे बाहर निकाला गया। इस बीच के समय में एक तय पैटर्न दिखा। हर प्लेनरी मीटिंग से कुछ हफ्ते पहले गिरफ्तारियां, नजरबंदी के आदेश और बैन लगाने के नोटिस जारी होते थे और रिव्यू टीम के जाते ही यह पाकिस्तान फिर अपने कदम वापस ले लेता है।हाफिज सईद पर FATF में दिखावा- हाफिज सईद को जेल में रखना या ढील देना किसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था बल्कि FATF की बैठकों के कैलेंडर के हिसाब से तय होता था ताकि पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट होने से बचाया जा सके। 2022 में FATF की 'ग्रे लिस्ट' से बाहर आने के बाद पाकिस्तान ने आतंकवाद रोकने के अपने कई वादे भुला दिए हैं।
सोशल मीडिया पर सरकार का सख्त कंट्रोल- पाकिस्तान अब सूचनाओं को दबाने में बहुत चालाक हो गया है। 2025 के नए PECA कानूनों के तहत बनी 'सोशल मीडिया अथॉरिटी' (SMPRA) किसी भी शिकायत पर 24 से 48 घंटे के भीतर कोई भी कंटेंट ब्लॉक कर सकती है। सरकार उन पोस्ट्स को इसलिए डिलीट नहीं कर रही क्योंकि वे झूठे हैं, बल्कि इसलिए कर रही है क्योंकि वे सरकार के खिलाफ हैं और लोगों के बीच वायरल हो रहे हैं।
सोशल मीडिया पर सरकार का सख्त कंट्रोल- पाकिस्तान अब सूचनाओं को दबाने में बहुत चालाक हो गया है। 2025 के नए PECA कानूनों के तहत बनी 'सोशल मीडिया अथॉरिटी' (SMPRA) किसी भी शिकायत पर 24 से 48 घंटे के भीतर कोई भी कंटेंट ब्लॉक कर सकती है। सरकार उन पोस्ट्स को इसलिए डिलीट नहीं कर रही क्योंकि वे झूठे हैं, बल्कि इसलिए कर रही है क्योंकि वे सरकार के खिलाफ हैं और लोगों के बीच वायरल हो रहे हैं।
चीनी तकनीक से जासूसी- एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान ने एक बहुत बड़ा और खतरनाक 'फायरवॉल' तैयार कर लिया है। 2018 में कनाडाई तकनीक और 2023 में चीनी तकनीक की मदद से एक ऐसा सर्विलांस सिस्टम बनाया गया है जिससे मोबाइल यूजर्स की बड़े पैमाने पर निगरानी की जा रही है।
