पहले बिहार SIR, फिर 5 राज्यों के चुनाव पर तकरार, ECI में कैसे बढ़ती गई ज्ञानेश कुमार और दोनों आयुक्तों के बीच दूरी?

पहले बिहार SIR, फिर 5 राज्यों के चुनाव पर तकरार, ECI में कैसे बढ़ती गई ज्ञानेश कुमार और दोनों आयुक्तों के बीच दूरी?
नई दिल्लीः मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार , दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच दूरी पिछले साल जून में बिहार में एसआईआर के दौरान ही शुरू हो गई थी। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस दूरी में अधिक कड़वाहट भरनी शुरू हुई इस साल 15 मार्च को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत पांच राज्यों में विधानसभा की घोषणा के दौरान। अप्रैल तक मामला इतना बिगड़ गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के निर्णयों पर खुलकर असहमति दर्ज करनी शुरू कर दी। सबसे पहले चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने दो अप्रैल को आईटी मॉड्यूल और पोर्टल को लेकर असहमति दर्ज कराई थी।

सूत्रों के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर असहमति दर्ज कराई थी। इसमें भी चुनाव आयुक्त विवेक जोशी से अधिक सुखबीर सिंह संधू आयोग के फैसलों से अधिक खफा रहे। सूत्रों ने यह भी बताया कि इस साल अप्रैल से चुनाव आयुक्त संधू की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से दूरी बढ़नी शुरू हो गई थी। क्योंकि, उन्होंने कुछ मुद्दों को लेकर आयोग से अपनी असहमति दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला और बिगड़ने लगा और आपस में बातचीत भी बहुत कम होने लगी थी। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो संधू को लगने लगा था कि आयोग की तरफ से एक तरह से उनकी अनदेखी की जा रही है। इसके बाद तल्खी बढ़ती गई।

'आपत्ति के बाद भी फॉर्म नंबर-6 में बदलाव'

एसआईआर प्रक्रिया के लिए युवा मतदाताओं को जोड़ने वाले फॉर्म नंबर-6 में डिक्लेरेशन करने के रूप में अतिरिक्त जानकारी लेने वाले कॉलम को जोड़ने का सबसे पहले विरोध चुनाव आयुक्त संधू ने ही किया था। सूत्रों का कहना है कि संधू ने आयोग से कहा था, 'इससे नौजवानों को वोटर बनने में बहुत परेशानी होगी। मुझे इस अतिरिक्त डिक्लेरेशन फॉर्म की कोई जरूरत नहीं लगती।' इसके बावजूद फॉर्म नंबर-6 में इस अतिरिक्त डिक्लेरेशन फॉर्म को फिर भी जोड़ा गया।

'ज्ञानेश कुमार के आते ही बदल गई कार्यप्रणाली'

सूत्रों का कहना है कि अभी भी तीनों के बीच दूरी नजर आ रही है। हालांकि, तीनों रोज ऑफिस आ रहे हैं लेकिन एक-दूसरे से बात ना के बराबर हो रही है। पत्राचार भी फाइलों के माध्यम से ही किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में 360 डिग्री बदलाव 19 फरवरी, 2025 के बाद से आना शुरू हुआ। इसी दिन ज्ञानेश कुमार चुनाव आयुक्त से मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए गए थे। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद से चुनावी प्रक्रिया संबंधी नई-नई चीजें शुरू हुई। साथ ही साप्ताहिक मीटिंग से पहले दोनों चुनाव आयुक्तों के पास अजेंडा जाना बंद हो गया। इससे दोनों चुनाव आयुक्तों को पता ही नहीं लगता था कि आज होने वाली मीटिंग का अजेंडा क्या है।

'आयोग में गुमसुम और तनावपूर्ण माहौल'

इसके अलावा सूत्रों ने चुनाव आयोग में कानूनी सलाह पर भी सवाल खड़े किए है। जिसमें कहा गया है कि आयोग किसकी कानूनी सलाह पर चल रहा है, फिलहाल कुछ नहीं पता। क्योंकि, आयोग के लिए जो लंबे समय से कानूनी सलाह देते थे, उन्होंने कुछ साल पहले उम्रदराज होने की वजह से काम छोड़ दिया था। उन्हें फिर से आयोग में लाने की कोशिश भी की गई लेकिन उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली देख आने से मना कर दिया। अब मीडिया रिपोर्ट आने और गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चुनाव आयोग का माहौल बेहद गुमसुम और तनावपूर्ण बना हुआ है। अधिकारी बात करने से भी हिचक रहे है।
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