सूत्रों के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर असहमति दर्ज कराई थी। इसमें भी चुनाव आयुक्त विवेक जोशी से अधिक सुखबीर सिंह संधू आयोग के फैसलों से अधिक खफा रहे। सूत्रों ने यह भी बताया कि इस साल अप्रैल से चुनाव आयुक्त संधू की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से दूरी बढ़नी शुरू हो गई थी। क्योंकि, उन्होंने कुछ मुद्दों को लेकर आयोग से अपनी असहमति दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला और बिगड़ने लगा और आपस में बातचीत भी बहुत कम होने लगी थी। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो संधू को लगने लगा था कि आयोग की तरफ से एक तरह से उनकी अनदेखी की जा रही है। इसके बाद तल्खी बढ़ती गई।
पहले बिहार SIR, फिर 5 राज्यों के चुनाव पर तकरार, ECI में कैसे बढ़ती गई ज्ञानेश कुमार और दोनों आयुक्तों के बीच दूरी?
नई दिल्लीः मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार , दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच दूरी पिछले साल जून में बिहार में एसआईआर के दौरान ही शुरू हो गई थी। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस दूरी में अधिक कड़वाहट भरनी शुरू हुई इस साल 15 मार्च को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत पांच राज्यों में विधानसभा की घोषणा के दौरान। अप्रैल तक मामला इतना बिगड़ गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के निर्णयों पर खुलकर असहमति दर्ज करनी शुरू कर दी। सबसे पहले चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने दो अप्रैल को आईटी मॉड्यूल और पोर्टल को लेकर असहमति दर्ज कराई थी।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर असहमति दर्ज कराई थी। इसमें भी चुनाव आयुक्त विवेक जोशी से अधिक सुखबीर सिंह संधू आयोग के फैसलों से अधिक खफा रहे। सूत्रों ने यह भी बताया कि इस साल अप्रैल से चुनाव आयुक्त संधू की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से दूरी बढ़नी शुरू हो गई थी। क्योंकि, उन्होंने कुछ मुद्दों को लेकर आयोग से अपनी असहमति दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला और बिगड़ने लगा और आपस में बातचीत भी बहुत कम होने लगी थी। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो संधू को लगने लगा था कि आयोग की तरफ से एक तरह से उनकी अनदेखी की जा रही है। इसके बाद तल्खी बढ़ती गई।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर असहमति दर्ज कराई थी। इसमें भी चुनाव आयुक्त विवेक जोशी से अधिक सुखबीर सिंह संधू आयोग के फैसलों से अधिक खफा रहे। सूत्रों ने यह भी बताया कि इस साल अप्रैल से चुनाव आयुक्त संधू की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से दूरी बढ़नी शुरू हो गई थी। क्योंकि, उन्होंने कुछ मुद्दों को लेकर आयोग से अपनी असहमति दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला और बिगड़ने लगा और आपस में बातचीत भी बहुत कम होने लगी थी। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो संधू को लगने लगा था कि आयोग की तरफ से एक तरह से उनकी अनदेखी की जा रही है। इसके बाद तल्खी बढ़ती गई।
