टूटी कलाई भी नहीं तोड़ पाई हौसला, हॉकी में नया मुकाम हासिल कर रहीं गोरखपुर की सोनाली सिंह

टूटी कलाई भी नहीं तोड़ पाई हौसला, हॉकी में नया मुकाम हासिल कर रहीं गोरखपुर की सोनाली सिंह
प्रमोद पाल (गोरखपुर): उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बांसगांव थाना क्षेत्र के राजगढ़ गांव की रहने वाली 25 साल की सोनाली सिंह आज उन युवाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं, जो मुश्किल परिस्थितियों में अपने सपनों को छोड़ देते हैं। एक साधारण किसान परिवार से आने वाली सोनाली ने विपरीत हालातों को चुनौती देते हुए नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। सोनाली के पिता नवल किशोर सिंह का निधन हो चुका है, जबकि उनकी मां कंचन सिंह हाउस वाइफ हैं।

इंजरी ने तोड़ा खिलाड़ी बनने का सपना

बचपन से ही खेलों में रुचि रखने वाली सोनाली ने गांव के स्कूल में पढ़ाई के दौरान हॉकी खेलना शुरू किया। उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए परिवार ने उनका दाखिला गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में कराया, जहां उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ हॉकी की बारीकियां सीखीं। करीब सात वर्षों तक स्पोर्ट्स कॉलेज में ट्रेनिंग लेने के दौरान सोनाली ने स्कूल स्तर से लेकर नेशनल स्तर तक कई जूनियर प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन एक प्रतियोगिता में उनकी कलाई में गंभीर चोट लग गई। ऑपरेशन के बाद उनकी कलाई में स्टील की तीन रॉड डालनी पड़ीं। इस चोट ने उनके खिलाड़ी बनने के सपने को लगभग खत्म कर दिया।

कोच ने अंपायरिंग करने की सलाह दी

चोट के बाद एक समय ऐसा भी आया जब सोनाली और उनके परिवार को लगा कि हॉकी खिलाड़ी के रूप में उनका सफर यहीं समाप्त हो जाएगा। हालांकि उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया। मां कंचन सिंह और कोच शशि नवैत ने लगातार उनका मनोबल बढ़ाया। मां ने उन्हें समझाया कि जीवन में केवल खिलाड़ी बनना ही लक्ष्य नहीं होता, बल्कि खेल से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी पहचान बनाई जा सकती है। इसी दौरान कोच शशि नवैत ने उन्हें अंपायरिंग में करियर बनाने की सलाह दी।

महिला जूनियर एशिया कप में अंपायरिंग की

सोनाली ने कोच के सुझाव को गंभीरता से लिया और हॉकी से जुड़े रहने के लिए अंपायर बनने का फैसला किया। उन्होंने अंपायरिंग की शुरुआती ट्रेनिंग अपने कोच से ली और बाद में भारतीय हॉकी फेडरेशन के अंपायर पैनल से जुड़े रघु प्रसाद आरवी से भी ट्रेनिंग ली। कड़ी मेहनत और समर्पण के दम पर सोनाली ने हॉकी अंपायर के रूप में एफआईएच की पात्रता हासिल की। इसके बाद उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में अंपायरिंग की। उनकी प्रतिभा और निष्पक्ष निर्णय क्षमता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ ने उन्हें अपने अंपायर पैनल में शामिल कर लिया।

हाल ही में 4 से 13 सितंबर 2026 तक चीन के मोकी शहर में आयोजितमहिला जूनियर हॉकी एशिया कप में सोनाली सिंह को अंपायरों के पैनल में शामिल किया गया। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने कई मुकाबलों में सटीक और निष्पक्ष अंपायरिंग कर अपनी क्षमता का परिचय दिया। भारत ने इस टूर्नामेंट का खिताब जीता था।
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