गाजियाबाद के ऐतिहासिक दूधेश्वरनाथ मठ में CM योगी ने किया जलाभिषेक, हर-हर महादेव से गूंज उठा पूरा मंदिर

गाजियाबाद के ऐतिहासिक दूधेश्वरनाथ मठ में CM योगी ने किया जलाभिषेक, हर-हर महादेव से गूंज उठा पूरा मंदिर
गाजियाबाद: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दो दिवसीय गाजियाबाद दौरे के दूसरे दिन शनिवार सुबह प्राचीन दूधेश्वरनाथ महादेव मठ पहुंचकर भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर परिसर में गुरुकुल वेद विद्यापीठ के विद्यार्थियों से मुलाकात की। महाशिवरात्रि और कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की तथा निर्माणाधीन दूधेश्वरनाथ कॉरिडोर के कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया। इस दौरान महंत नारायण गिरी ने मुख्यमंत्री का पटका पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मंदिर में पूरे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान दूधेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया। पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने गुरुकुल के छात्रों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान सीएम ने कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और दूधेश्वरनाथ कॉरिडोर के निर्माण की प्रगति पर भी विस्तार से जानकारी ली। इस अवसर पर महंत नारायण गिरी, शहर विधायक संजीव शर्मा, लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर और डीएम रविन्द्र कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

हर हर महादेव के नारों से गूंजा मंदिर परिसर

मुख्यमंत्री के मंदिर पहुंचते ही पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' और 'जय श्री राम' के जयघोष से गूंज उठा। मंदिर में जलाभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जिसका मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार करते हुए जवाब दिया। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुबह से ही मंदिर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस से मंदिर तक जीटी रोड पर उनके काफिले के गुजरने के दौरान कुछ समय के लिए यातायात रोका गया, जिससे दिल्ली गेट और हापुड़ तिराहे पर पीक आवर में कुछ देर के लिए जाम लग गया। मंदिर से निकलने के बाद मुख्यमंत्री पुलिस लाइन पहुंचे और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए बुलंदशहर रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में ललिता गौतम के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा भी दिया।


दूधेश्वरनाथ का पौराणिक इतिहास

गाजियाबाद का प्राचीन दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर देश के प्रमुख शिव धामों में माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में रावण के पिता महर्षि विश्रवा इस स्थान पर भगवान शिव की आराधना करने आते थे। बाद में शिवभक्त रावण ने भी यहां भगवान शिव की पूजा की। मंदिर की परंपरा के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है। मान्यता है कि यह शिवलिंग लंबे समय तक धरती में दबा रहा और कलियुग में संवत 1511 (1454 ई.) में पुनः प्रकट हुआ। इसके बाद इस स्थान का महत्व लगातार बढ़ता गया। छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी यहां दर्शन-पूजन कर मंदिर के जीर्णोद्धार में योगदान दिया। आज सावन, महाशिवरात्रि तथा कांवड़ यात्रा के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। नामचीन खिलाड़ी, अभिनेता और विदेशों से भी शिवभक्त यहां भगवान दूधेश्वरनाथ का जलाभिषेक करने आते हैं।
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