पहली बार यह तय किया गया है कि जो व्यक्ति अपना या अपने परिवार के सदस्य का टिकट बनवाने आएगा, उसे अन्य लोगों की तुलना में प्राथमिकता मिलेगी। साथ ही टोकन लेने के लिए पहचान और संबंध साबित करने वाले दस्तावेज भी अनिवार्य होंगे। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य आरक्षण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, वास्तविक यात्रियों को सुविधा देना और अनधिकृत एजेंटों तथा बिचौलियों पर प्रभावी रोक लगाना है।
क्या थी पुरानी व्यवस्था?
अब तक तत्काल टिकट के लिए "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर टोकन दिए जाते थे। कोई भी व्यक्ति सुबह लाइन में लगकर टोकन ले सकता था। यह स्पष्ट नहीं होता था कि वह अपने लिए टिकट बनवा रहा है या किसी और के लिए। पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच भी इतनी सख्त नहीं थी। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग बार-बार लाइन में लगकर कई यात्रियों के टिकट बनवाने की कोशिश करते थे, जिससे आम यात्रियों को परेशानी होती थी।
अब क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था में केवल पहले आने से काम नहीं चलेगा। टोकन लेने वाले को यह बताना होगा कि वह अपना टिकट बनवा रहा है, परिवार के सदस्य का या किसी अन्य व्यक्ति का। इसके आधार पर उसे दो श्रेणियों में रखा जाएगा।
प्राथमिकता 'ए' में स्वयं और निकट परिवार (माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, भाई-बहन, दादा-दादी) के टिकट शामिल होंगे। इन यात्रियों के सभी आवेदन पहले निपटाए जाएंगे। इसके बाद प्राथमिकता 'बी' के तहत अन्य लोगों के टिकटों की बुकिंग होगी।
आधार और दस्तावेज होंगे जरूरी
नई व्यवस्था में स्वयं, परिवार या अन्य व्यक्ति के टिकट के लिए अलग-अलग दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। यदि परिवार के सदस्य का टिकट बनवाया जा रहा है तो संबंध साबित करने वाले सरकारी दस्तावेज भी देने होंगे। वहीं अन्य व्यक्ति का टिकट बनवाने पर उसके पहचान पत्र की स्वयं सत्यापित प्रति और हस्ताक्षर भी जरूरी होंगे।
टोकन भी सीमित रहेंगे
एसी तत्काल टिकट के लिए सुबह 8:30 से 9 बजे तक प्रति काउंटर अधिकतम 10 टोकन और स्लीपर (नॉन एसी) के लिए 9 से 9:30 बजे तक अधिकतम 15 टोकन जारी किए जाएंगे। टोकन पर संबंधित काउंटर का नंबर दर्ज रहेगा और उसका रिकॉर्ड रजिस्टर में रखा जाएगा।
दलालों पर कैसे लगेगी रोक?
नई व्यवस्था में टोकन हस्तांतरणीय नहीं होगा। यानी जिसने टोकन लिया है, टिकट भी वही बनवा सकेगा। बार-बार टोकन लेने वालों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी आसान होगी। रेलवे का मानना है कि इससे फर्जी बुकिंग और दलालों की भूमिका काफी हद तक कम होगी।
रेलवे ने कहा कटारिया ने बताया कि पहले भी टोकन व्यवस्था थी, लेकिन वह केवल "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर चलती थी। अब उसमें प्राथमिकता और दस्तावेज सत्यापन जैसी नई शर्तें जोड़ दी गई हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पहले वास्तविक यात्री और उनके परिवार को सुविधा मिले तथा पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बने। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अधिकृत आरक्षण काउंटर से ही टिकट बनवाएं और किसी भी अनधिकृत एजेंट या बिचौलिये के झांसे में न आएं।











