इटैलियन न जानने वाले छात्रों की संख्या सीमित
मेलोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "इटैलियन भाषा पर जिनकी पकड़ अच्छी नहीं है, एक क्लास में उन छात्रों की संख्या पर 30% की सीमा तय की गई है। हमारी भाषा सीखने के लिए और साधन दिए गए हैं और स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाई गई है।"मेलोनी ने इन उपायों को समझदारी भरा कदम बताया और कहा कि ये "बांटते नहीं बल्कि असल में घुलने-मिलने में मदद करते हैं।" शिक्षा मंत्री ने ग्यूसेप वाल्डिटारा ने कहा कि "यह सीमा पूरी तरह भाषा से जुड़ी है, न कि नागरिकता से।" उन्होंने नकाब और बुर्के पर रोक को लैंगिक समानता के मुद्दे के तौर पर पेश किया। वहीं, विपक्षी पार्टियों का कहना है कि मेलोनी अगले साल चुनावों से पहले दक्षिणपंथी नीतियों को बढ़ावा दे रही हैं।
हिजाब पर नहीं लगाई रोक
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को कैबिनेट की बैठक से पहले इस आदेश के कई ड्राफ्ट तैयार किए गए थे, लेकिन मुख्य बातें साफ थीं। चेहरा ढंकने पर लगी रोग बुर्के और नकाब पर लागू होगी। हिजाब को इससे बाहर रखा गया है, क्योंकि उसमें चेहरा दिखता रहता है। अगर किसी बच्चे को स्कूल में घुलने-मिलने में परेशानी होती है, तो सोशल सर्विस को बुलाया जाएगा और माता-पिता को मुफ्त इटैलियन क्लास में शामिल होना होगा। ऐसा न करने पर 1000 यूरो () का जुर्माना लगाया जाएगा।तुरंत लागू हो सकता है आदेश
कैबिनेट ने इसे एक डिक्री लॉ के रूप में मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि यह तुरंत लागू हो सकता है, लेकिन इसे 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी मिलना जरूरी है। मेलोनी सरकार यह नियम ऐसे समय में लेकर आई है जब अगले साल होने वाले आम चुनावों से पहले इंटीग्रेशन का मुद्दा छाया हुआ है।इटली के स्कूलों में इटैलियन भाषा को लेकर पहले ही गाइडलाइंस मौजूद हैं। साल 2010 में जारी एक सरकारी नोटिस में बिना इटैलियन नागरिकता वाले छात्रों के लिए नियम के तौर पर 30 प्रतिशत की सीमा तय की गई थी। नया आदेश इस सीमा को कानून का रूप देता है।
