चीन जितना कच्चा तेल खरीदता है उसे वो समुद्री रास्तों से ही मंगवाता है। ऐसे में अगर युद्ध के समय चीन की एनर्जी सप्लाई लाइन को ही बंद कर दिया जाए तो उसकी इकोनॉमी डगमगा सकती है। ताइवान के समय युद्ध में अमेरिका ऐसा कर सकता है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) की मई 2025 की एक रिपोर्ट कहती है कि चीन का 92% तेल समुद्री रास्तों से आता है। चीन जो तेल खरीदता है उसका बहुत छोटा हिस्सा ही पाइपलाइन के जरिए रूस, कजाकिस्तान और म्यांमार से आता है।
ईरानी जहाज पर हमले से चीन के डरने की वजह जानिए
चाइना पावर ने जून 2025 में अनुमान लगाया था कि रूस के अलावा चीन का लगभग 80% तेल इंपोर्ट मलक्का स्ट्रेट से होकर गुजरता है। भारत का इस क्षेत्र में दबदबा है। मलक्का स्ट्रेट, हिंद महासागर में दाखिल होने का दरवाजा है। मलक्का स्ट्रेट ब्लॉक होने से चीन के क्रूड ऑयल सप्लाई लाइन को ब्लॉक किया जा सकता है। अगर मलक्का स्ट्रेट ब्लॉक हो जाता है तो चीन तेल शिपमेंट को जारी रखने के लिए लोम्बोक-मकासर स्ट्रेट, सुंडा स्ट्रेट, आर्कटिक नॉर्दर्न सी रूट और अमेरिका से पैसिफिक रूट और ईस्ट साइबेरिया-पैसिफिक रूट जैसे दूसरे रास्ते ढूंढ सकता है।अमेरिका ने चीन की इन कमजोरियों को पकड़ रखा है। बहरीन में मौजूद US का 5वां फ्लीट और डिएगो गार्सिया से काम करने वाली US सेनाएं हिंद महासागर में चीनी सप्लाई लाइन को कभी भी काट सकती हैं।भारतीय नौसेना और ऑस्ट्रेलियन नौसेना भी हिंद महासागर में चीन के तेल शिपमेंट को रोकने में मदद कर सकती हैं।
दिसंबर 2023 के प्रोसीडिंग्स आर्टिकल में जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट माइकल हैनसन ने लिखा था कि US और उसके साथी इन सप्लाई लाइनों के दूसरे छोर पर भी चीनी शिपिंग रूट को ब्लॉक कर सकते हैं, खासकर होर्मुज की खाड़ी पर, जहां फारस की खाड़ी हिंद महासागर से जुड़ती है और बाब अल-मंडेब पर, जहां लाल सागर अदन की खाड़ी से जुड़ता है।
बरुआ ने बताया कि 2008 में सामान्य तैनाती शुरू करने के बाद से चीन ने नौसेना एक्टिविटीज़ बढ़ा दी हैं, जिसमें 2014 में शुरू हुई सबमरीन तैनाती और 2017 में जिबूती में अपना पहला विदेशी मिलिट्री बेस बनाना शामिल है।
दिसंबर 2023 के प्रोसीडिंग्स आर्टिकल में जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट माइकल हैनसन ने लिखा था कि US और उसके साथी इन सप्लाई लाइनों के दूसरे छोर पर भी चीनी शिपिंग रूट को ब्लॉक कर सकते हैं, खासकर होर्मुज की खाड़ी पर, जहां फारस की खाड़ी हिंद महासागर से जुड़ती है और बाब अल-मंडेब पर, जहां लाल सागर अदन की खाड़ी से जुड़ता है।
हिंद महासागर में कैसे अपनी ताकत बढ़ा रहा चीन?
इन कमजोरियों को देखते हुए चीन, हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज़ (IISS) के लिए मई 2025 में लिखे एक आर्टिकल में दर्शना बरुआ के मुताबिक, चीन ने समुद्री कम्युनिकेशन लाइनों की सुरक्षा और बड़े समुद्री लक्ष्यों को मदद करने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मिलिट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर की मौजूदगी को लगातार बढ़ाया है।बरुआ ने बताया कि 2008 में सामान्य तैनाती शुरू करने के बाद से चीन ने नौसेना एक्टिविटीज़ बढ़ा दी हैं, जिसमें 2014 में शुरू हुई सबमरीन तैनाती और 2017 में जिबूती में अपना पहला विदेशी मिलिट्री बेस बनाना शामिल है।
मलक्का स्ट्रेट बंद हुआ तो कैसे घुटनों पर होगा चीन?
हिंद महासागर की समुद्री कम्युनिकेशन लाइनों को सुरक्षित करने के अलावा चीन रूस के साथ अपनी पार्टनरशिप को गहरा करके कॉन्टिनेंटल पिवट की कोशिश कर रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स ने इस महीने रिपोर्ट किया है कि रूस पहले से ही चीन का सबसे बड़ा तेल सप्लायर है, जो चीन की तेल खरीद का 20% हिस्सा है।इसीलिए रूसी तेल पर चीन की निर्भरता यूक्रेन युद्ध के नतीजे पर निर्भर कर सकती है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने जोर देकर कहा है कि चीन नहीं चाहता कि रूस यूक्रेन में हारे। लेकिन हार न मानने का मतलब अपने आप जीतना नहीं है। इसीलिए हिंद महासागर काफी महत्वपूर्ण बन चुका है जहां से चीन को घुटनों पर लाया जा सकता है।











