इस कानून के लागू होने के बाद अब अगर किसी व्यक्ति को जनता की सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है, तो उसे एक साल तक के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) में रखने की अनुमति रहेगी।
संपत्ति जब्त करने का मिला अधिकार
वहीं, इस कानून के लागू हो जाने से राज्य सरकार को यह शक्ति मिल गई है कि वह बीएनएस के उचित प्रावधानों का इस्तेमाल करके ऐसे अपराध में शामिल व्यक्ति की संपत्ति जब्त कर सके। नए कानून के तहत पुलिस को यह अधिकार भी मिलेगा कि अगर उन्हें शक हो कि कोई व्यक्ति अशांति फैला सकता है, तो वे उसे किसी खास इलाके से बाहर निकाल सकते हैं या वहां आने से रोक सकते हैं। साथ ही, इस कानून को लागू करने में शामिल पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षा भी दी जाएगी।इसको लेकर विपक्षी दलों और समाज के एक वर्ग ने इस प्रावधान को कठोर बताया है और तर्क दिया है कि इससे पुलिस को अपनी 'मर्जी' से किसी को भी हिरासत में लेने की खुली छूट मिल जाएगी और इस तरह यह विपक्ष या आलोचना करने वाली आवाजों को दबाने में प्रभावी हो सकता है।
सलाहकार बोर्ड बनेगा
भाजपा की ओर से इसके जवाब में तर्क दिया गया कि प्रिवेंटिव डिटेंशन तभी प्रभावी होगा जब उचित और विस्तृत प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इस प्रिवेंटिव डिटेंशन प्रावधान को लागू करने के लिए एक सलाहकार बोर्ड बनाया जाएगा जो यह तय करेगा कि किसी खास व्यक्ति के मामले में ऐसी हिरासत उचित है या नहीं।सलाहकार बोर्ड प्रिवेंटिव डिटेंशन की उचितता का आकलन करेगा। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को बोर्ड के सामने अपना बचाव करने के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार होगा। बोर्ड की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के मौजूदा या पूर्व जज करेंगे। इसमें दो अन्य सदस्य भी होंगे जो हाई कोर्ट के जज बनने की योग्यता रखते हों।











