12 अगस्त को BRICS की एक बैठक के दौरान भारत और मिस्र के बीच लोकल करेंसी यानी रुपये और मिस्री पाउंड में व्यापार करने और फिनटेक सहयोग को लेकर बेहद अहम चर्चा हुई है। एक तरफ जहां मिस्र को अबू धाबी से वित्तीय मदद की दरकार है वहीं भारत के साथ वह अपने व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है। भारतीय वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि 12 अगस्त को जयपुर में ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नर्स की बैठक के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिस्र के अपने समकक्ष अहमद कौचुक से मुलाकात की और इन मुद्दों पर चर्चा की।
भारत के साथ समझौते से इजिप्ट को कई फायदे
रिपोर्ट्स के मुताबिक इजिप्ट अगर पाकिस्तान वाले गठबंधन में शामिल होता तो उसे कोई आर्थिक फायदा नहीं होता। लेकिन भारत और यूएई के साथ रहने में उसे जबरस्त आर्थिक फायदे होंगे। भारतीय वित्त मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों के मंत्रियों ने 'स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के निपटान' और फिनटेक और इनोवेशन के क्षेत्र में व्यवस्थित सहयोग पर चर्चा की है।यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब भारत सीमा-पार व्यापार और भुगतान में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ब्रिक्स देश भी सीमा-पार भुगतान को आसान बनाने और लेन-देन की लागत कम करने के लिए अपने तेज भुगतान सिस्टम और सेंट्रल बैंक की डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं
तुर्की को उम्मीद आगे इजिप्ट भी बनेगा गुट का हिस्सा
शनिवार को एक इंटरव्यू में तुर्की के विदेश मंत्री फिदान ने इस बात पर जोर नहीं दिया कि मिस्र ने अभी इस संधि में शामिल न होने का फैसला किया है। उन्होंने कहा 'मुझे लगता है कि अगले चरण में मिस्र भी इस गठबंधन का हिस्सा बन जाएगा।'लेकिन मिडिल ईस्ट आई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मिस्र के एक दूसरे सूत्र ने बताया कि मिस्र का यह फैसला मुख्य रूप से इजरायल के साथ उसके संवेदनशील रिश्तों की वजह से लिया गया है।अमेरिका का सहयोगी औक इजरायल का पड़ोसी इजिप्ट जिसका यूएई के साथ काफी मजबूत संबंध हैं वो तुर्की वाले इस्लामिक गठबंधन को यूएई और भारत के साथ अपने संबंध के लिए एक खतरा मान रहा है।
