2007 के केस में 2012 में जारी हुआ था स्थायी वारंट
मामला साल 2007 का है। विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर में तहत रेलवे संपत्ति अवैध कब्जा अधिनियम की धारा 3(अ) में केस दर्ज हुआ था। इस मामले में भिलाई के वीर नारायण नगर निवासी समीम खान आरोपी था। उसका स्थायी पता निजामपुर, जिला सिवान, बिहार बताया गया है। कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ साल 2012 में स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद से RPF लगातार आरोपी की तलाश कर रही थी। वारंट तामील अभियान के तहत आरपीएफ दुर्ग की टीम आरोपी के स्थायी पते पर पहुंची। टीम में सउनि निरंजन, प्रधान आरक्षक बी. राजोरिया और आरक्षक एस.आर. मीना शामिल थे।
घर पहुंची टीम तो पता चला- 2010 से सऊदी अरब में रह रहा
निजामपुर में आरोपी के परिवार से पूछताछ करने पर पता चला कि समीम खान साल 2010 से सऊदी अरब में रहकर काम कर रहा है। यानी जिस मामले में उसके खिलाफ वारंट जारी हुआ था, उस समय से काफी समय बाद तक वह विदेश में रहा। इसके बाद आरपीएफ ने आरोपी के परिवार और उससे लगातार संपर्क किया। उसे भारत आकर कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने और सरेंडर करने के लिए समझाया गया। आखिरकार आरोपी सऊदी अरब से भारत आया और RPF पोस्ट दुर्ग में पहुंचकर सरेंडर किया। आरपीएफ के मुताबिक आरोपी ने वारंट में दर्ज नाम और पता अपना ही होना स्वीकार किया। इसके बाद उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई और उसे विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर के सामने पेश किया गया।
11 साल पुराने केस में ओडिशा से गिरफ्तारी
आरपीएफ दुर्ग की टीम ने 20 अगस्त को एक और पुराने मामले में कार्रवाई की। रेलवे संपत्ति चोरी से जुड़े करीब 11 साल पुराने मामले में फरार आरोपी को ओडिशा के केंदुझर से पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को भी न्यायालय के सामने पेश किया गया।
एक साल में करीब 30 वारंटियों तक पहुंची RPF
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, वारंट तामील अभियान के तहत पिछले एक साल में करीब 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि पुराने मामलों में भी कार्रवाई जारी रहेगी और लंबे समय से फरार आरोपियों को तलाशकर कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।
