ईटी की एक रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से बताया गया है कि एक्सपोर्टर्स इस सामान को वापस मंगा रहे हैं ताकि उन्हें मोटी फीस न देनी पड़े। बंदरगाहों पर करीब 38,000 कंटेनर अटके हुए हैं जिनमें से लगभग आधे कंटेनर वापस बुलाए जा रहे हैं। इस सामान को स्टोर किया जा रहा है या घरेलू बाजार में बेचा जा रहा है। जल्दी खराब होने वाली चीजों जैसे फल और सब्जियां तथा दवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
2,000 डॉलर का सरचार्ज
अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से पश्चिमी देशों को सामान भेजने में ज्यादा लागत आती है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि एक्सपोर्टर्स कार्गो वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं। यह केस-टू-केस बेसिस पर हो रहा है। ईरान का कहना है कि वह केवल अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय जहाजों को निशाना बना रहा है लेकिन एक्सपोर्टर्स और शिपिंग कंपनियां सतर्कता बरत रही हैं। कई शिपिंग कंपनियां शिपमेंट कैंसि कर हैं या भारी सरचार्ज वसूल रही हैं।- पश्चिम एशिया में संकट के कारण कई शिपिंग रूट्स बंद हैं
- बंदरगाहों ने शिपमेंट लेना बंद किया, वसूल रहे हैं मोटी फीस
- कई एक्सपोर्टर्स को अपना सामान वापस मंगाना पड़ रहा है
एक एक्सपोर्टर ने कहा कि 2,000 डॉलर का सरचार्ज लिया जा रहा है जिससे एक्सपोर्ट घाटे का सौदा बन गया है। फल और सब्जियों का एक्सपोर्ट करने वाले पुणे के एक ट्रेडर ने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो फिर सामान को घरेलू बाजार में बेचना पड़ेगा। कोलकाता के एक इंजीनियरिंग एक्सपोर्टर ने कहा कि उसके चार कंटेनर नवी मुंबई के जेएनपीटी पोर्ट पर फंसे हैं। इनमें से दो कतर के दोहा और दो मिस्र जाने हैं।











