विनोद यादव ने बताया कि वह घर पर सो रहे थे, तभी पुलिस उन्हें जबरन उठाकर थाने ले गई। पत्नी पर दर्ज मुकदमे के चलते उन्हें निशाना बनाया गया जबकि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। विनोद का आरोप है कि थाने के भीतर मनीष सिंह, विनय पटेल, मुन्नालाल चौकी इंचार्ज और राजकुमार और नफीस नाम के दो सिपाहियों ने उन्हें बेल्ट, पट्टे और जूतों से बेरहमी से पीटा। पुलिस की मौजूदगी में विपक्षी श्रीराम प्रधान की पत्नी ने भी उन्हें थप्पड़ व पट्टे मारे। थर्ड डिग्री टॉर्चर के बाद पुलिस ने उनका शांति भंग (धारा 151) में चालान कर छोड़ा, जबकि शरीर पर गंभीर चोटों के निशान हैं।
थाना प्रभारी से जब सवाल किया गया कि विनोद यादव ने तीन दारोगा, दो सिपाहियों और विरोधी पक्ष पर थाने के भीतर थर्ड डिग्री टॉर्चर देने का आरोप लगाया है। उनके पूरे बदन पर गंभीर चोटों और सूजने के निशान हैं। इस पर इंस्पेक्टर ने कहा- ये बात विनोद से ही जाकर पूछिए। मुझे नहीं पता है। पुलिस क्यों मारेगी उन्हें।
पीड़ित पक्ष ने पुलिस आयुक्त से लगाई गुहार
पूरे मामले में अब पीड़ित पक्ष ने पुलिस आयुक्त और मानवाधिकार आयोग से शिकायत कर दोषी पुलिसकर्मियों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
