वाखान कॉरिडोर अफगानों के लिए इतना महत्वपूर्ण कैसे है?
- वाखान कॉरिडोर बदख्शां प्रांत में अफगान क्षेत्र की एक संकीर्ण पट्टी है जो ताजिकिस्तान को पीओके के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से अलग करती है।
- इस कॉरिडोर को बनाने में करीब 5.5 मिलियन डॉलर का खर्च आया है।
- इस गलियारे की लंबाई लगभग 350 किलोमीटर है। इसकी चौड़ाई अलग-अलग जगहों पर 16 से 64 किलोमीटर के बीच बदलती रहती है।
- यह घाटी पामीर नॉट के पास स्थित है जहां दुनिया की तीन सबसे बड़ी पर्वतमालाएं हिंदुकुश, काराकोरम और पामीर आपस में मिलती हैं।
क्या भारत से सीधे जुड़ जाएगा अफगानिस्तान?
वाखान कॉरिडोर की दक्षिणी सीमा का लगभग 106 किलोमीटर लंबा हिस्सा भारत के लद्दाख (वर्तमान में पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र) से सीधे छूते हुए निकलता है। यदि यह पीओके (PoK) क्षेत्र भारत के वास्तविक नियंत्रण में होता तो भारत को इस कॉरिडोर के जरिए बिना पाकिस्तान पर निर्भर रहे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी ज़मीनी पहुंच मिल जाती।पिछले साल भारत और तालिबान के अधिकारियों के बीच इस कॉरिडोर को लेकर उस वक्त महत्वपूर्ण बातचीत हुई थी जब तालिबान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्ताकी ने नई दिल्ली का दौरा किया था। 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश साम्राज्य और जारशाही रूसी साम्राज्य के बीच 'ग्रेट गेम' के दौरान इस कॉरिडोर को एक 'बफर जोन' के रूप में बनाया गया था ताकि दोनों बड़े साम्राज्यों की सीमाएं आपस में न टकराएं।
भारत के लिए इसके मायने और रणनीतिक लाभ
- तालिबान के विदेश मंत्री के साथ बैठक के दौरान भारत ने अफगानिस्तान की क्षेत्रीय संप्रभुता और अखंडता का पूरा समर्थन किया था।
- भारत ने स्पष्ट संदेश दिया था कि वाखान कॉरिडोर (जो ऐतिहासिक सिल्क रूट का हिस्सा है) के खुलने की स्थिति में भारत अपनी 106 किलोमीटर लंबी सीमा दावे (जो गिलगित-बाल्टिस्तान/PoK से लगती है) को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है।
- अब तक भारत को अफगानिस्तान या मध्य एशिया जाने के लिए पाकिस्तान के जमीनी रास्ते की जरूरत पड़ती थी जिसे पाकिस्तान हमेशा रोकता था। वाखान कॉरिडोर के जरिए भारत भविष्य में पाकिस्तान को पूरी तरह बाईपास कर सकता है अगर पीओके पर भारत का पूरा कंट्रोल हो जाए।
- इसके अलावा चीन और पाकिस्तान ने भारत को घेरने के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान से CPEC निकाला है। वाखान कॉरिडोर के खुलने और वहां भारत-तालिबान के बढ़ते प्रभाव से चीन के इस कॉरिडोर की काट तैयार होती है।
