व्लादिमीर पुतिन आज चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करने वाले हैं जिसमें इस बात पर चर्चा होगी कि चीन और रूस के बीच की रणनीतिक साझेदारी को कैसे और मजबूत किया जाए। इसके अलावा "अहम अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा"। ट्रंप के चीन दौरे के कुछ ही दिनों बाद शी जिनपिंग और पुतिन ने "बधाई पत्र" का आदान-प्रदान किया था। चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक शी जिनपिंग ने कहा कि रूस और चीन के बीच द्विपक्षीय सहयोग "लगातार गहरा और मजबूत हुआ है" क्योंकि इस साल दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की 30वीं वर्षगांठ है।
व्लादिमीर पुतिन का चीन दौरा महत्वपूर्ण क्यों है?
पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकात उस वक्त हो रही है जब यूक्रेन युद्ध और तेज हो चुका है। पुतिन ने मंगलवार को एक वीडियो संदेश में कहा कि चीन के साथ रिश्ते "सचमुच एक अभूतपूर्व स्तर" पर पहुंच गए हैं और यह कि "रूस और चीन के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है।" उन्होंने आगे कहा "रूस और चीन के बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंध वैश्विक स्तर पर एक बड़ी और स्थिर भूमिका निभाते हैं। किसी के भी खिलाफ गठबंधन किए बिना हम शांति और सार्वभौमिक समृद्धि चाहते हैं।" पुतिन ने इस दौरान किसी भी तीसरे देश का नाम नहीं लिया।जानकारों के मुताबिक चीन की पुतिन की इस यात्रा का समय काफी अहम है क्योंकि यह ट्रंप की उस यात्रा के ठीक बाद हो रही है जिस पर सभी की नजरें टिकी थीं। हालांकि चीन में डोनाल्ड ट्रंप का सिर्फ स्वागत किया गया और अमेरिकी राष्ट्रपति चीन से कोई खास वादा नहीं ले पाए। इसके अलावा बीजिंग से अमेरिका के दर्जन भर से ज्यादा कारोबारी भी खाली हाथ ही लौटे। इसके अलावा शी जिनपिंग ने ताइवान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप को 'युद्ध की धमकी' तक दे डाली। चीन ने यह भी साफ कर दिया है कि वह रूस के साथ अपने रिश्तों से पीछे नहीं हटेगा।











