LCA (तेजस) मार्क-1 के लिए एयरफोर्स की तरफ से 40 एयरक्राफ्ट के ऑर्डर दिए गए थे। इसमें 20 आईओसी (इनीशियल ऑपरेशनल क्लियरेंस) थे और 20 एफओसी (फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस)। इन 40 में से 8 ट्रेनर एयरक्राफ्ट थे। साल 2019 से एयरफोर्स को फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस वाले LCA मिलने शुरू हुए। लेकिन 2 एफओसी (ट्रेनर) मिलने में देरी हुई और अब हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ये दो एयरक्राफ्ट एयरफोर्स को डिलीवर कर रहा है।
20 साल बाद बेसिक फ्लाईंग के लिए स्वदेशी प्लेटफॉर्म
एयरफोर्स को 20 साल बाद बेसिक फ्लाईंग की ट्रेनिंग के लिए स्वदेशी प्लेटफॉर्म मिल रहे हैं। एचएएल तीन HTT40 ट्रेनर भी एयरफोर्स को डिलीवर कर रहा है। इंडियन एयरफोर्स के पास ट्रेनर एयरक्राफ्ट की भी कमी है। जिसे दूर करने के लिए हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से ट्रेनर एयरक्राफ्ट खरीदने की डील साइन हुई थी।रक्षा मामलों की संसदीय कमिटी को पिछले साल रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि वर्तमान में एयरफोर्स के पास ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए HAL के साथ 70 एचटीटी-40 इंडिजिनियस ट्रेनर एयरक्राफ्ट की डील साइन हुई है। जब ये ट्रेनर एयरक्राफ्ट एयरफोर्स में ऑपरेशनलाइज हो जाएंगे उसके बाद 36 अतिरिक्त एचटीटी-40 लिए जाएंगे।
अब HTT40 ट्रेनर मिलने शुरू हो रहे हैं। पहले बेसिक ट्रेनिंग एचपीटी-32 में दी जाती थी जो स्वदेशी था। करीब 20 साल पहले ये रिटायर हो गया। HTT40 ट्रेनर के मिलने से अब फिर से स्वदेशी प्लेटफॉर्म में ट्रेनिंग दी जाएगी। अभी स्टेज वन ट्रेनिंग पिलेटस में दी जाती है। स्टेज टू ट्रेनिंग किरण-1 और पिलेटस में और स्टेज 3 ट्रेनिंग हॉक्स में दी जाती है। हॉक्स भी पुराने हो रहे हैं। पिलेटस का भी रिप्लेसमेंट चाहिए। HTT-40 पिलेटस को रिप्लेस करेंगे।
अब HTT40 ट्रेनर मिलने शुरू हो रहे हैं। पहले बेसिक ट्रेनिंग एचपीटी-32 में दी जाती थी जो स्वदेशी था। करीब 20 साल पहले ये रिटायर हो गया। HTT40 ट्रेनर के मिलने से अब फिर से स्वदेशी प्लेटफॉर्म में ट्रेनिंग दी जाएगी। अभी स्टेज वन ट्रेनिंग पिलेटस में दी जाती है। स्टेज टू ट्रेनिंग किरण-1 और पिलेटस में और स्टेज 3 ट्रेनिंग हॉक्स में दी जाती है। हॉक्स भी पुराने हो रहे हैं। पिलेटस का भी रिप्लेसमेंट चाहिए। HTT-40 पिलेटस को रिप्लेस करेंगे।
LCA (तेजस) मार्क-1A का क्या स्टेटस
एयरफोर्स को अपनी कम होती फाइटर स्क्वॉड्रन के बीच LCA मार्क-1A फाइटर जेट का इंतजार है। इसमें पहले ही करीब 2 साल की देरी हो चुकी है। ये एयरफोर्स को कब मिलने शुरू होंगे, इस पर HAL के सीएमडी के. रवि ने कहा कि सिस्टम को एक साथ जोड़ने (इंटीग्रेशन) से जुड़ी कुछ समस्याओं को अभी सुलझाना बाकी है। रडार से जुड़ी कुछ समस्याएं भी हैं, जिन्हें दूर करना है। इसके अलावा, सिस्टम के इंटीग्रेशन से जुड़े कुछ टेस्ट भी पूरे करने हैं।रडार करीब 90 से 95 फीसदी तक काम कर रहा है, लेकिन बाकी 5 फीसदी की जांच अभी होनी बाकी है। मिसाइल को सिस्टम के साथ जोड़ दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद कुछ टेस्ट अभी पूरे किए जाने हैं। हमारे पास अभी 10 इंजन और 27 एयरफ्रेम तैयार हैं। इसलिए उम्मीद है कि हम इन्हें इस वित्त वर्ष में डिलीवर कर सकेंगे।
