टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 86 के मुताबिक कंपनी की एजीएम में कम से कम पांच सदस्यों का व्यक्तिगत रूप से मौजूद होना जरूरी है। इनमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) द्वारा संयुक्त रूप से नॉमिनेट किया गया प्रतिनिधि भी शामिल होना चाहिए, बशर्ते उनके पास कंपनी की कम से कम 40% इक्विटी हो। इसमें कोई दिक्कत नहीं थी क्योंकि दोनों ट्रस्टों के पास टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी है।
क्या है पेच?
लेकिन महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने SRTT को पब्लिक ट्रस्ट कानूनों के कथित उल्लंघन के कारण बोर्ड मीटिंग में हिस्सा लेने से रोक दिया है। इस कारण अब इस शर्त को पूरा करना मुश्किल हो गया है। SRTT बोर्ड मीटिंग के बिना SDTT के साथ मिलकर प्रतिनिधि नॉमिनेट करने में हिस्सा नहीं ले सकता।एक वकील ने कहा कि इस कारण बैठक पर ही एक तरह से 'वीटो' लग गया है। अगर ट्रस्ट का नॉमिनी मौजूद नहीं है, तो कोई वैध कोरम नहीं बनता और कोई कामकाज नहीं हो सकता, चाहे कितने भी अन्य सदस्य मौजूद क्यों न हों। अगर कोरम पूरा नहीं होता है, तो आर्टिकल 87 के तहत बैठक को स्थगित (adjourn) किया जा सकता है। हालांकि स्थगित बैठक में पांच सदस्यों की शर्त में ढील दी जाती है, लेकिन ट्रस्ट के प्रतिनिधि की मौजूदगी जरूरी बनी रहती है।क्या हैं विकल्प?
हालांकि आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन इस बारे में कुछ नहीं कहता कि अगर ट्रस्ट के प्रतिनिधि की अनुपस्थिति के कारण स्थगित बैठक भी विफल हो जाती है, तो क्या होगा? पिछले साल की मीटिंग में SDTT और SRTT के पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री और दोनों ट्रस्टों के मौजूदा वाइस-चेयरमैन विजय सिंह ने प्रतिनिधित्व किया था। हालांकि ट्रस्ट कई प्रतिनिधियों को अधिकृत कर सकते हैं, लेकिन उनसे उम्मीद की जाती है कि वे मिलकर काम करें और अपने संयुक्त बहुमत वोट का इस्तेमाल करें।टाटा संस 31 दिसंबर से पहले एजीएम आयोजित करने के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से समय बढ़ाने की मांग कर सकता है। साथ ही ट्रस्ट चैरिटी कमिश्नर से आदेश में ढील देने की मांग कर सकते हैं, ताकि SRTT, SDTT के साथ मिलकर प्रतिनिधि नॉमिनेट कर सके। या फिर वे निर्देशों के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं।











