विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए विशेष सत्र

विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए विशेष सत्र
 विधानसभा की 70वीं वर्षगांठ पर विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के विजन पर एक दिवसीय विशेष सत्र में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संकल्प व्यक्त किया है कि जनहित और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर हम प्रदेश का एक नया इतिहास लिखेंगे। डाॅ मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने और आगामी तीन वर्ष के लिए योजनाओं पर चर्चा हेतु आहूत विधानसभा का विशेष सत्र अपने आप में एक अनूठी पहल मानी जायेगी जिसमें ज्यादातर चर्चा रचनात्मक हुईं। संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राजनीति से ऊपर उठते हुए यह भी रेखांकित किया कि प्रदेश के विकास में स्थापना से लेकर आज तक जितने भी मुख्यमंत्री हुए हैं सबका कुछ न कुछ योगदान रहा है और उन्होंने प्रदेश को आगे बढ़ाने का ही काम किया है। विजयवर्गीय का यह बताने का प्रयास सराहनीय माना जायेगा कि उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर यह माना कि विकास यात्रा में सभी पार्टियों व मुख्यमंत्रियों का योगदान रहा है। यह विशेष सत्र था इसलिए इसमें ज्यादातर सकारात्मक चर्चा ही हुई, लेकिन सामान्य सत्रों में भी यह अपने आप में एक उदाहरण बन सकता है ताकि जनहित के मुद्दों पर अधिक चर्चा हो सके। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कई प्रस्तावों का स्वागत किया साथ ही  यह मांग भी उठाई कि सरकार भले ही 2047 की योजनायें बनाये लेकिन 2026 की भी गारंटी दे। हमारे प्रजातंत्र की यही खूबसूरती है कि दलगत राजनीति भले ही विविध विचारों को प्रश्रय देती हो लेकिन जनता द्वारा चुनी हुई सरकार को केवल जनहित देखना चाहिये और विपक्ष को उन मुद्दों पर केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करना चाहिए जो कि जनता के हित में हों। हालांकि विपक्ष का यह दायित्व भी है कि वह सरकार पर अंकुश रखे ताकि सरकार और नौकरशाही हावी ना हो पाये। चूंकि लोकतंत्र जनता के लिए होता है इसलिए जनहित को ही सर्वोच्च प्राथमिकता मिलना चाहिए, यह केवल सकारात्मक राजनीति से ही संभव हो सकता है।
     मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने सदन में विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने संकल्प प्रस्तुत करते हुए अपनी सरकार की प्राथमिकतायें रेखांकित कीं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता में रोजगार और युवा हैं तथा पांच साल में हम ढाई लाख सरकारी पद भरेंगे। जो भी गड़बड़ी करेगा उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी। प्रदेश में गुजरात की तर्ज पर वनतारा भी बनायेंगे। हमारे पास नेता, नीति और नियत है और प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाकर ही दम लेंगे। भले ही पिछले दो सालों में हमारे द्वारा किए गए काम अभी कम लगें लेकिन आगे यह मील का पत्थर साबित होंगे। प्रदेश की भाजपा सरकारों ने बीमारु कहे जाने वाले प्रदेश को विकासशील से विकसित राज्य की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है। लाल सलाम को भी प्रदेश ने आखिरी सलाम कर दिया है। मुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि लाडली बहना योजना कभी बन्द नहीं होगी। भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटिन सिटी बनाने का निर्णय लिया है। भोपाल के लिए भविष्य की राजधानी कैसी हो इस दिशा में काम कर रहे हैं। भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटिन सिटी बनाने के साथ यह भी भरोसा दिलाया कि ग्वालियर और जबलपुर को 1926 में मेट्रापोलिटिन सिटी बनाने का काम हाथ में लेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री अर्जुनसिंह का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि नवोदय विद्यालय उन्होंने दिये जिन्होंने कि स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर जैसा कार्य कर किया।
और यह भी
     संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय का अपना ही अंदाजेबयां है, उन्होंने प्रदेश के अब तक रहे 17 मुख्यमंत्रियों और उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की। रविशंकर शुक्ला से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक की कार्यशैली व उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिनमें भाजपा और कांग्रेस दोनों के मुख्यमंत्री शामिल हैं। उनका कहना था कि शिवराज सिंह चौहान की योजनायें ऐसी रहीं जिनका पूरा देश नकल कर रहा है, चाहे लाडली बहना हो, चाहे लाडली लक्ष्मी हो, जननी एक्सप्रेस हो या सीएम कन्यादान योजना। महाकाल लोक व एकात्मधाम उन्हीं की देन है। कमलनाथ के बारे में उनका कहना था कि कमलनाथ में जबरदस्त प्रशासनिक क्षमता थी और उन्होंने ही औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए सिंगल विन्डो योजना आरम्भ की, उनके पास बहुत सारी योजनायें थीं परन्तु समय कम था इसलिए वे उतना नही कर पाये। उमा भारती की सलाह पर ही एमपी आरडीसी का गठन किया गया, उसके बाद दस हजार करोड़ रुपये की सड़कें बनाई गयीं। भारी विरोध के बावजूद उमा ने हरसूद खाली कराया तब इंदिरा सागर बांध पहली बार भरा। दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट और बाणसागर बांध उन्हीं के प्रयासों से बना। कोलार जल परियोजना में भी उन्हीं के प्रयास थे और दिग्विजय सिंह से राजनीतिक सौजन्यता सीखनी चाहिये। रवि शंकर शुक्ला ने नियोगी आयोग का गठन किया और प्रदेश में धर्मान्तरण रोकने की दिशा में कदम बढ़ाये। कैलाश नाथ काटजू ने वल्लभ भवन का निर्माण कराया। गोविंदनारायण सिंह ने रीवा में एपीसी यूनिवर्सिटी और विंध्य क्षेत्र में बाणसागर बांध को मंजूरी दिलाई। राजा नरेश चंद्र प्रदेश के पहले आदिवसी मुख्यमंत्री रहे।  श्यामाचरण शुक्ला ने प्रदेश में शहरीकरण को बढ़ावा दिया। प्रकाश चंद्र सेठी ने चंबल में डकैतों के आत्मसमर्पण की पहल की जबकि कैलाश जोशी ने ग्रामीण विकास की नींव रखी। वीरेंद्र कुमार सखलेचा ने नर्मदा घाटी विकास को आगे बढ़ाया। अर्जुनसिंह ने कला, संस्कृति और विरासत को बढ़ावा दिया जबकि मोतीलाल वोरा ने संवेदनशील और मेहनती प्रशासन दिया। सुंदरलाला पटवा और बाबूलाल गौर ने अतिक्रमण हटाने की पहल की।
-अरुण पटेल
-लेखक सुबह , संपादक  

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