इनमें एक ट्रेन में उबले आलू खराब स्थिति में पाए गए, जबकि दूसरी कार्रवाई में अनधिकृत पैकिंग वाली पानी की बोतल और बिना स्वीकृति वाले ब्रांड का दूध मिला।
जांच के दावों पर सवाल
रेलवे की ओर से बताया गया है कि स्टेशन पर सीएचआई द्वारा महीने में 3-4 बार खान-पान की जांच की जाती है। खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं और रिपोर्ट करीब 8 से 10 दिन में आती है।
आईआरसीटीसी की क्विक रिस्पांस टीम भी स्टेशनों और ट्रेनों में समय-समय पर जांच करती है। जिसमें प्रतिदिन करीब 10-12 अवैध वेंडरिंग के मामले सामने आते हैं। ऐसे में सवाल है कि नियमित जांच के बावजूद अनधिकृत और संदिग्ध खाद्य सामग्री ट्रेनों तक कैसे पहुंच रही है।
