चबूतरे को कराया जा रहा था ठीक
प्राचीन वीरभद्र महादेव मंदिर के पास पीपल के पेड़ के नीचे स्थित छोटा सा शिव मंदिर है। इसका चबूतरा जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था। इसको देखते हुए एक भक्त ने इसे ठीक कराने का निर्णय लिया। चबूतरा निर्माण के लिए मजदूर लगाए गए थे। चबूतरा निर्माण के लिए खुदाई का काम चल रहा था। इसी बीच पत्थर की शिलाओं पर उकेरी गई मूर्तियों के अवशेष मिलने शुरू हो गए। इसकी जानकारी आसपास के लोगों तक आग की तरह फैल गई।मूर्तियों के निकलने का मामला जानते ही लोग मंदिर पहुंचने लगे। इन मूर्तियों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इसी बीच इसकी जानकारी भारतीय पुरातत्व विभाग, देहरादून को मिली। विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और मूर्तियों के अवशेषों की फोटोग्राफी कर मूर्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र की।
खुदाई-निर्माण है प्रतिबंधित
तीर्थनगरी ऋषिकेश के प्राचीन मंदिरों में प्रसिद्ध वीरभद्र महादेव मंदिर के आसपास का क्षेत्र भारतीय पुरातत्व विभाग के अनुसार महत्वपूर्ण है। इसको लेकर मंदिर से 300 मीटर के दायरे में किसी तरह की खुदाई और निर्माण को प्रतिबंधित किया गया है। वीरभद्र महादेव मंदिर के सामने खुदाई के दौरान पहले भी प्राचीन मंदिर, मूर्तियों के अवशेष और अन्य प्राचीन अवशेष मिल चुके हैं।इसको लेकर भारतीय पुरातत्व विभाग ने संरक्षित क्षेत्र घोषित कर पर्यटकों के लिए म्यूजियम के तौर पर बनाया गया है। मंदिर परिधि में एक बार फिर प्राचीन मूर्तियों के अवशेष मिलने पर शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है।











