इसके अलावा कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शनकारियों ने भारतीय राष्ट्रध्वज का भी अपमान किया है जिसपर भारत सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा 'भारत की सरकार और बीजेपी या आरएसएस की आलोचना की पूरी स्वतंत्रता है लेकिन भारत और तिरंगे के अपमान को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है 'ये भूल बहुत भारी पड़ेगी।'
अमेरिका की मुस्लिम सांसद ने क्या कहा?
अमेरिकी सांसद रशीदा तलेब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है 'मोहन भागवत और उनकी नफरत भरी हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा का हमारे समुदायों में स्वागत नहीं है। उनका अर्ध-सैन्य संगठन RSS सिखों, मुसलमानों, दलितों, ईसाइयों और अन्य लोगों के खिलाफ हिंसक हमलों और सुनियोजित हिंसा के लिए जिम्मेदार है। हमें हर तरह की नफरत और वर्चस्व की भावना को नकारना होगा।' मुस्लिम सांसद रशीदा तलेब की इस बयान पर सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है।लेखक सूर्यकांत सानू ने रशीदा तलेब को जवाब देते हुए लिखा है 'तो आप इस्लाम को खारिज कर रही हैं? हमें नफरत और श्रेष्ठता की भावना के सभी रूपों को नकारना होगा।' इसके अलावा एक और डेमोक्रेटिक सांसद मैकगवर्न ने भी भागवत के दौरे की आलोचना की है। US कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) के पूर्व अध्यक्ष स्टीफन श्नेक और नादिन माएंजा की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए मैकगवर्न ने कहा कि 'RSS ने भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा को मुख्यधारा में लाने' में मदद की है।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा 'इसके प्रमुख मोहन भागवत को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। नफरत फैलाने के लिए उन्हें कोई मंच नहीं दिया जाना चाहिए।' मैकगवर्न ने पोस्ट में भागवत के सरनेम की स्पेलिंग गलत लिखते हुए उन्हें 'Baghwat' लिखा
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में क्या कहा?
आपको बता दें कि मोहन भागवत ने रविवार को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' में करीब 5,000 से ज्यादा लोगों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' (AHEAD) फोरम ने किया था और इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और दूसरी कलात्मक प्रस्तुतियां शामिल थीं। अपने संबोधन में भागवत ने एकता, विविधता और इंसानों के आपस में जुड़े होने के विचारों पर जोर दिया।उन्होंने कहा 'जब भी आप अमेरिका के बारे में सोचते हैं तो अक्सर एक शब्द पर चर्चा होती है बहुलवाद। जब हम भारत की बात करते हैं तो एक और वाक्यांश पर चर्चा होती है विविधता में एकता। भारत के लिए, एकता और विविधता दोनों ही उसके DNA में हैं।'
