MP-UDC में गुजरात की कंपनी का बड़ा फर्जीवाड़ा, 6.57 करोड़ की जाली बैंक गारंटी पर दिया ठेका, भोपाल में FIR दर्ज

MP-UDC में गुजरात की कंपनी का बड़ा फर्जीवाड़ा, 6.57 करोड़ की जाली बैंक गारंटी पर दिया ठेका, भोपाल में FIR दर्ज

भोपाल। मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपी-यूडीसी) ने जाली बैंक गारंटी के आधार पर गुजरात की एक कंपनी को करोड़ों रुपयों का ठेका दे दिया। काम पूरा होने के बाद जब बैंक से पत्राचार हुआ तो फर्जीवाड़े का पता चला।

अब एमपी-यूडीसी के वित्त नियंत्रक सौरभ तिवारी ने भोपाल के एमपी नगर थाने में सूरत की इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी प्राइवेट लिमिटेड- (ज्वाइंट वेंचर विद साउथ गुजरात कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड) के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी की शिकायत दर्ज कराई है।

एमपी-यूडीसी मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों करती है काम

पुलिस के अनुसार, एमपी-यूडीसी मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में नल-जल और सीवरेज परियोजनाओं का क्रियान्वयन कराती है। 2024 में इस सरकारी कंपनी ने टेंडर के जरिए एडीबी फेज-1, एडीबी फेज-2 और विशेष निधि के अंतर्गत मंडलेश्वर परियोजना का काम आवंटित किया था। यह काम इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी प्रा.लि. को मिला।

अनुबंध के तहत इस कंपनी ने निष्पादन और सुरक्षा प्रतिभूति के रूप में करीब 6.57 करोड़ रुपये की आठ बैंक गारंटी जमा कराई थीं। यह बैंक गारंटी बैंक आफ इंडिया की साकीनाका (मुंबई) और आइसीआइसीआइ बैंक, तीनहाट नाका (ठाणे) के नाम से बनाई गई थी।

बैंक गारंटी सही होने की पुष्टि

एमपी-यूडीसी के अधिकारियों ने बैंक गारंटी को पुष्ट करने के लिए बैंकों के अधिकृत पते पर जाने के स्थान पर ई-मेल भेजा, जो बैंक गारंटी वाले दस्तावेज पर दर्ज थीं। जवाब में बैंक गारंटी सही होने की पुष्टि भी मिल गई।

इस पुष्टि के आधार पर अनुबंध प्रभावी कर दिए गए और संबंधित फर्म ने परियोजनाओं का काम पूरा कर लिया। बाद में बैंक गारंटी के मूल दस्तावेज रजिस्टर्ड डाक से संबंधित बैंक शाखाओं को भेजकर भौतिक सत्यापन कराया गया।

तीनों बैंक गारंटी फर्जी

सत्यापन के दौरान बैंक आफ इंडिया की साकीनाका (मुंबई) शाखा ने स्पष्ट किया कि उसके नाम से प्रस्तुत पांचों बैंक गारंटी कभी उनके द्वारा जारी हुई ही नहीं। आइसीआइसीआइ की तीनहाट नाका (ठाणे) शाखा ने भी अपने नाम से प्रस्तुत तीनों बैंक गारंटी को फर्जी बताया। इसके बाद एमपी-यूडीसी को फर्जीवाड़े का एहसास हुआ।

संचालकों के नंबर भी बंद

पुलिस ने जांच के दौरान कंपनी के संचालक से पूछताछ के लिए उपलब्ध मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया, लेकिन दोनों नंबर बंद मिले। इसके कारण उसके बयान दर्ज नहीं हो सके। पुलिस अब कंपनी के संचालकों और इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। बता दें कि बैंक गारंटी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि ठेकेदार शर्तों का पालन न करे तो उसकी राशि जब्त की जा सके।

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