नियामकीय निकाय के अनुसार, यह कार्रवाई रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स के स्टोरेज, पैकेजिंग और बाजार से दवा वापस मंगाने की प्रक्रियाओं में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के कारण की गई है। एफडीए के मुताबिक, लाइसेंस रद्द करने का आदेश 27 अगस्त से प्रभावी हो गया है। यह कार्रवाई पुणे जिले के वाडकी स्थित कंपनी के मुख्य वेयरहाउस में की गई जांच के बाद हुई।
1. अनधिकृत दावा और जब्ती
- इस साल जून के आसपास किए गए शुरुआती निरीक्षण के दौरान एफडीए अधिकारियों ने पाया कि रिएक्टिन प्लस (शेड्यूल H की एक प्रिस्क्रिप्शन दवा) की पैकेजिंग पर अनधिकृत रूप से एनाल्जेसिक और एंटीपायरेटिक (दर्द निवारक और बुखार रोधी) लिखा हुआ था।
- एफडीए के अनुसार, इस तरह का प्रमोशनल दावा दवा एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 का उल्लंघन है।
- नियम उल्लंघन पाए जाने पर एफडीए ने 11.19 लाख रुपये मूल्य का स्टॉक जब्त कर लिया था।
- शुरुआती जांच के बाद नियामक ने कंपनी को इस भ्रामक पैकेजिंग वाली दवा को बाजार से वापस मंगाने (रिकॉल) का आदेश दिया था।
- एफडीए के अनुसार कंपनी इस निर्देश का पूरी तरह से पालन करने में असमर्थ रही।
- एफडीए के निरीक्षण में कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज स्टॉक और वास्तविक भौतिक स्टॉक के बीच अंतर पाया गया।
- इसके अलावा खरीद और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी कमियां सामने आईं।
- दवाइयों को रैक्स के बजाय सीधे जमीन पर रखने और एक्सपायरी दवाओं के निस्तारण में गंभीर लापरवाही देखी गई।
